शिक्षा से बदलेंगे नक्सलप्रभावित इलाकों की तस्वीर
इस बजट में घोर नक्सलप्रभावित रह चुके जगरगुंडा और अबूझमाड़ में एजुकेशन सिटी बनाई जाएंगी. जगरगुंडा और अबूझमाड़ को अबतक नक्सलियों की अघोषित राजधानी के रूप में पहचाना जाता था. अब नक्सलियों की इसी राजधानी में नक्सलप्रभावित इलाकों के बच्चों के लिए सरकार प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक की व्यवस्था करेंगी. यही नहीं तो बच्चों और उन्हें पढ़ाने वाले शिक्षकों के रहने के लिए भी उच्च श्रेणी की व्यवस्थाएं की जाएंगी. समय के साथ इन एजुकेशन सिटीज को हाईटेक एजुकेशन फैसिलिटीज और कोर्सेस से अपडेट किया जाएगा. इसके साथ ही नक्सलप्रभावित और आदिवासी अंचलों में 2 मेडिकल कॉलेज भी प्रस्तावित किए गए है. इन इलाकों के युवाओं की करियर काउंसलिंग के लिए भी विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे. NEET, CLAT, JEE, Banking, UPSC और CGPSC के अलावा रेलवे चयन की परीक्षा तैयारी के लिए 33 करोड़ का प्रावधान किया जाएगा.
अबूझमाड़ के नारायणपुर कुतुल, ओरछा, जाटलूर, बीजापुर का चेरपाल दंतेवाड़ा का मुचनार ये वो इलाके है जहां नक्सलियों ने सड़कों काटकर इस क्षेत्र को पूरी तरह से नक्सलियों के किले में तब्दील कर दिया था. इन क्षेत्रों के अंदरूनी इलाकों में सड़के तो थी, लेकिन उसपर आवागमन नहीं होता था. कही सड़के जमीन के अंदर दफ्न हो गई थी. क्योंकि दशकों से उसपर गाड़िया नहीं चली थीं और कही नक्सलियों ने सड़कों को उखाड़ फेंका था. एक इलाके से दूसरे इलाके को पूरी तरह से काट दिया था. इन इलाकों के लोगों को बाजार से सामान खरीदने भी कई पहाड़ों को पार करना पड़ता था अब सरकार ने बजट में ऐसे इलाकों के लिए सैकड़ों करोड़ों का प्रावधान किया है ताकि आइसोलेटेड एरिया में सड़कें पुल बन पाए और इलाके फिर एक दूसरे से जुड़ जाएं. ताकि लोग आसानी से बाजार अस्पताल और अपनी जरूरत की जगह जा सकें.
कृषि आधारित उद्योगों से लोगो को देंगे आसान रोजगार
खुद नक्सलप्रभावित इलाकों में कई सालों तक नौकरी कर चुके ओपी चौधरी ने अपने बजट में नक्सलग्रस्त इलाकों के आर्थिक विकास के लिए ऐसा रास्ता चुना है जो आदिवासियों के घर या कहे उनके जंगल से निकलता है. नक्सलप्रभावित बस्तर संभाग,गरियाबंद और राजनांदगांव, मोहला मानपुर के इलाके के आदिवासी पूरी तरह वनोपज पर आधारित है. वे ज्यादातर कृषि और वनोपज आधारित कार्य जानते हैं, जिसके चलते इस इलाके में वनोपज और कृषि उद्योग आधारित इंडस्ट्री लगाने पर राज्य सरकार उद्योगों को विशेष अनुदान देंगी. कृषि और वनोपज आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन देने अलग-अलग मद में सैकड़ों करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है. इन उद्योगों से प्रकृति प्रेमी आदिवासी आसानी से रोजगार पाएंगे और जिससे नक्सलवाद का विचार पूरी तरह समाप्त होगा.
मार्च 2026 तक नक्सलवाद मिटाने का है संकल्प
केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद के समूल नष्ट का संकल्प लिया है, जो लगभग साकार होता नजर आ रहा है. जिसके बाद अब इन इलाकों को ध्यान में रखकर राज्य सरकार अपना बजट बना रही है, जिससे भविष्य में इन इलाकों में नक्सलवाद के प्रति कोई सहानभूति या जगह नहीं होंगी.
बस्तर के विकास के साथ सुरक्षा पर जोर
छत्तीसगढ़ सरकार को बस्तर में नक्सली तंत्र को ध्वस्त करने में बड़ी सफलता मिली है. सवा साल में 305 नक्सली ढेर हुए हैं. वहीं 1000 ने आत्मसमर्पण किया है. नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पुलिस बल को सशक्त करने पर सरकार का विशेष जोर है. सरकार NSG की तर्ज पर SOG (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) बनाएगी, जो नक्सल उन्मूलन में अहम भूमिका निभाएगी. 10 जिलों में एन्टी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स, 5 जिलों में साइबर थाने बनेंगे. खनिज संसाधनों की सुरक्षा के लिए CISF के तर्ज पर SISF का गठन किया जाएगा. पुलिस बल को मजबूत करने के लिए एक नवीन भारत रक्षित वाहिनी का गठन किया जाएगा.
नक्सलवाद को खत्म करने में बस्तर फाइटर के योगदान को देखते हुए बजट में 3200 अतिरिक्त पदों के सृजन का प्रावधान किया गया है. दो नक्सल प्रभावित ग्राम एलमागुंडा तथा डब्बाकोंटा में नवीन पुलिस थाना खोला जाएगा.
हर साल बस्तर ओलंपिक के आयोजन के लिए ₹5 करोड़ का प्रावधान किया गया है. योग शिविरों के लिए ₹2 करोड़ और जैव विविधता टूरिज्म जोन के लिए ₹10 करोड़ का बजट रखा गया है. गांवों तक सरकारी योजनाओं को पहुंचाने के लिए बनी नियद नेल्लानार (मेरा सुंदर गांव) योजना के लिए 25 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है. बस्तर संभाग के सभी जिलों में लोक उत्सवों के आयोजन (बस्तर मड़ई) और बस्तर मैराथन के लिए भी बजट में 2 करोड़ की राशि का प्रावधान किया गया है. वहीं, बस्तर सरगुजा में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए होम स्टे पालिसी बनाई जाएगी.
बस्तर में अब हर रास्ता होगा आसान, हर गांव होगा स्मार्ट
छत्तीसगढ़ सरकार ने बस्तर और अन्य इलाकों में सड़कें, पुल, स्कूल और डिजिटल सुविधाओं का विस्तार करने का बड़ा फैसला लिया है. जनजातीय क्षेत्रो में बुनियादी सुविधाओं और अधोसंरचना के विकास के लिए 221 करोड़ का प्रावधान किया गया है. वहीं, पीएम जनमन के तहत सस्कूल शिक्षा विभाग को 30 करोड़, आदिम जाति कल्याण विभाग को 12 तथा आवास निरमा के लिए 300 करोड़ का प्रावधान किया गया है. अब गांवों तक पक्की सड़कें बनेंगी, जिससे लोग आसानी से सफर कर सकेंगे. स्कूलों में नई सुविधाएं जुड़ेंगी. ताकि बच्चे बेहतर शिक्षा पा सकें. इंटरनेट और बिजली की व्यवस्था को भी मजबूत किया जाएगा, जिससे गांवों के लोग भी डिजिटल दुनिया से जुड़ सकें.
बजट की मुख्य बातें:
- कोई नया टैक्स नहीं – आम जनता और व्यापारियों को राहत.
- पेट्रोल की कीमत में एक रुपए कमी का निर्णय.
- सड़कों और डिजिटल कनेक्टिविटी में निवेश – नए पुल, सड़कें और इंटरनेट सुविधा का विस्तार.
- 2047 तक विकसित छत्तीसगढ़ का लक्ष्य – 10 बड़े मिशन के तहत आर्थिक और सामाजिक विकास की योजना.
- व्यापारियों को राहत: छोटे व्यापारियों के लिए बकाया कर माफी योजना लाई जाएगी, जिससे उनका आर्थिक बोझ कम होगा.
- ई-वे बिल की नई सीमा: पहले ₹50,000 से ज्यादा कीमत की वस्तु ले जाने पर ई-वे बिल बनाना जरूरी था, अब यह सीमा ₹1 लाख कर दी गई है, जिससे व्यापार करना आसान होगा.
- डिजिटल नवाचार को बढ़ाने सीएम सुशासन फेलोशिप योजना शुरू होगी.
- छोटे शहरों के विकास के लिए मुख्यमंत्री रिंग रोड योजना के लिए 100 करोड़ का प्रावधान किया गया है.
- पहली बार एक वित्तीय वर्ष में नई सड़कों के निर्माण के लिए 2000 करोड़ का प्रावधान किया गया है.
- नगर निगमों के सुनियोजित विकास के लिए मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना होगी शुरू होगी, जिसके लिए 500 करोड़ का बजट रखा गया है.
- ग्राम पंचायतों में यूपीआई पेमेंट की व्यवस्था की जाएगी.
- भविष्य की पेंशन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पेंशन फंड बनाया जाएगा.
- कर्मचारियों के डीए में 3 प्रतिशत बढ़ोत्तरी का निर्णय.
- जिला स्तर पर तकनीक का उपयोग करते हुए जीडीपी का मूल्यांकन करने के लिए स्टेटिस्टिकल एनालिसिस सिस्टम की स्थापना की जाएगी.
- स्थानीय आदिवासी संस्कृति के संरक्षण के लिए संग्रहालय की स्थापना की जाएगी.
- नया रायपुर में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी की स्थापना की जाएगी.
- नगरीय निकायों के अधोसंरचना विकास के लिए 750 करोड़ रखे गए हैं.
- मुख्यमंत्री गृह प्रवेश सम्मान योजना भी शुरू की जाएगी.
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