बरनाला में कांग्रेसी नेता राहुल गांधी की रैली के बड़े सियासी मायने हैं। उन्होंने यहां भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तो जबरदस्त तरीके से निशाने पर लिया लेकिन आम आदमी पार्टी पर वे कुछ नहीं बोले। इतना ही नहीं उन्होंने पंजाब के किसी मसले, मुद्दे या समस्या का भी जिक्र नहीं किया।
हालांकि भारत-यूएस ट्रेड डील का किसानों और व्यापारियों पर पड़ने वाले प्रभाव के दौरान उन्होंने पंजाब का नाम जरूर लिया मगर विशेष तौर पर उन्होंने सूबे के किसी मुद्दे को नहीं छुआ। राहुल की इस कूटनीति पर भाजपा और शिअद ने तंज कसा है।
पंजाब भाजपा के उपाध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों और मीडिया सचिव विनीत जोशी ने कहा कि बरनाला रैली में किसानों-मजदूरों के मुद्दे गायब रहे। राहुल गांधी द्वारा पंजाब में मजदूरों के साथ मनरेगा के तहत हुए हजारों करोड़ रुपये के घोटालों और किसान संकट का कोई उल्लेख न करना इस बात का प्रमाण है कि पंजाब में कांग्रेस आम आदमी पार्टी की बी टीम के रूप में काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि पंजाब में मनरेगा योजना के तहत बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं और हजारों करोड़ रुपये के घोटालों के आरोप लगते रहे हैं लेकिन बरनाला रैली में कांग्रेस ने न तो मजदूरों की बकाया मजदूरी का मुद्दा उठाया और न ही किसानों की समस्याओं पर कोई स्पष्ट रणनीति पेश की। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दोनों ही इस मामले में चुप हैं जिससे स्पष्ट होता है कि दोनों दल एक-दूसरे को राजनीतिक लाभ पहुंचाने के लिए काम कर रहे हैं।
अब की कमजोर कड़ी बर्दाश्त नहीं करेगा हाईकमान
चंडीगढ़। बरनाला में राहुल ने पंजाब के वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं को साफ संदेश दे दिया है कि सत्ता हासिल करने की राह में इस बार गुटबाजी का रोड़ा आड़े नहीं आने दिया जाएगा। उन्होंने साफ कहा कि जो टीम प्लेयर बनकर काम नहीं करेगा उसे बाहर रिजर्व में बैठा दिया। राहुल ने सख्त लहजे में यहां तक कह दिया कि गुटबाजी करने वाले नेताओं का इलाज वे और खरगे जी मिलकर करेंगे।
दरअसल पंजाब में सात नेता ऐसे हैं जो खुद को सीएम फेस मानते हैं इसके लिए वे सभी लॉबिंग में जुटे रहते हैं और उनके सुर भी पार्टी लाइन से अलग ही रहते हैं। इन नेताओं में पूर्व सीएम तक शामिल हैं। इसी वजह से पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर को कांग्रेस ने निकाला जा चुका है। उसके बाद से नवजोत सिंह सिद्धू भी शायरी के जरिये अपने सियासी विरोधियों पर निशाना साध रहे हैं।
कांग्रेस ने सिद्धू को फिलहाल बाहर बैठा रखा है और उन्हें राहुल गांधी से मिलने का समय भी नहीं मिल पा रहा है। पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी भी पार्टी लीडरों के खिलाफ तंज कस रहे थे, राहुल का यह कड़ा संदेश उनके लिए भी माना जा सकता है।
इसके अलावा पिछले दिनों पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने बयान दिया था कि जो सांसद है, वे सीएम फेस नहीं हो सकते। इस पर भी कुछ नेताओं को दिक्कत थी मगर राहुल की इस चेतावनी के बाद वे नेता भी पटरी पर आ जाएंगे। कांग्रेस हाईकमान यह भी तय कर चुका है कि पंजाब में इस बार कांग्रेस बिना सीएम फेस के विधानसभा चुनाव लड़ेगी। सीएम कौन बनेगा, इसका फैसला बाद में हाईकमान करेगा।
कांग्रेस हाईकमान अपना प्रभाव खो चुकी : जाखड़
पंजाब भाजपा के अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने कहा कि जिस तरह कांग्रेस नेता राहुल गांधी को पंजाब आकर अपने ही नेताओं को सार्वजनिक रूप से नसीहत देनी पड़ी, उससे यह साबित होता है कि कांग्रेस का हाईकमान अपना प्रभाव खो चुका है और प्रदेश नेतृत्व बेलगाम हो चुका है। यह नसीहत बंद कमरे में भी दी जा सकती थी। रैली में न तो पंजाब के लिए कोई एजेंडा था और न ही किसानों या मजदूरों से जुड़े मुद्दों पर कोई चर्चा हुई।
कांग्रेसियों का झगड़ा निपटाने आए थे राहुल : सुखबीर
शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल ने कहा कि राहुल गांधी समझ चुके हैं कि पंजाब में उनकी पार्टी टूट के कगार पर है। उन्हें न तो पंजाबियों की चिंता है और न ही पंजाब की। उनकी रैली में पंजाब के लिए कोई पॉजिटिव एजेंडा ही नहीं था। वे यहां सिर्फ पंजाब कांग्रेस में चल रहे झगड़े को शांत करवाने आए थे।
दिल्ली में बुलाकर नेताओं को डांट लेते : बिट्टू
राहुल गांधी के बयान पर केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत बिट्टू ने भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि समझ नहीं आ रहा कि राहुल गांधी पार्टी के प्रधान नहीं हैं तो किस हैसियत से उन्होंने पंजाब के कांग्रेसियों को बाहर बैठाने की चेतावनी दी। खैर, यदि कांग्रेसियों को डांटना ही था तो उन्हें दिल्ली बुलाकर डांट लेते। वे कांग्रेसी नेता जिन्होंने लाखों व करोड़ों रुपये खर्च कर बरनाला में रैली की, भीड़ जुटाई उनकी खुलेआम राहुल गांधी मंच से ही बेइज्जती कर गए।
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