पूर्णिया के सबसे चर्चित और हृदयविदारक सूरज बिहारी हत्याकांड की गुत्थी को जिला पुलिस ने अंततः सुलझा लिया है। शनिवार को पुलिस अधीक्षक स्वीटी सहरावत ने प्रेस वार्ता कर इस जघन्य हत्याकांड का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि मामले में शामिल पांच मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि दो नामजद आरोपी अब भी फरार हैं।
पुलिस जांच में जो कहानी सामने आई है, उसने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। यह वारदात किसी पुरानी दुश्मनी या पेशेवर रंजिश का नतीजा नहीं थी, बल्कि इसकी शुरुआत इंस्टाग्राम पर पोस्ट की गई एक रील से हुई। रील पर की गई एक मामूली टिप्पणी ने पहले गाली-गलौज, फिर मारपीट और अंततः हत्या का रूप ले लिया।
मरंगा थाना में आयोजित प्रेस वार्ता में एसपी स्वीटी सहरावत ने बताया कि विवाद के दौरान आरोपियों ने सूरज बिहारी की ही पिस्टल छीन ली और उसी हथियार से उनकी गोली मारकर हत्या कर दी। जिस पिस्टल को सूरज ने अपनी सुरक्षा के लिए रखा था, वही उनकी मौत का कारण बन गई। पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त पिस्टल को बरामद कर लिया है।
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घटना के बाद SIT और DIU की टीमें लगातार आरोपियों का पीछा कर रही थीं। गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी बीते दस दिनों से दिल्ली, नोएडा और भोपाल में ठिकाने बदलते रहे। पुलिस का दबाव बढ़ने और कुर्की-जब्ती का इश्तेहार चस्पा होने के बाद वे नेपाल भागने की फिराक में थे। इसी दौरान पुलिस ने घेराबंदी कर मुख्य आरोपी अमन सिंह, बृजेश सिंह और नंदू सिंह को रुपौली थाना क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया। वहीं, स्नेहील झा और आदित्य ठाकुर ने मुजफ्फरपुर में न्यायालय के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया।
हालांकि, आरोपियों की गिरफ्तारी के बावजूद इस परिवार का दर्द कम नहीं हुआ है। बेटे की निर्मम हत्या का सदमा पिता जवाहर यादव सहन नहीं कर सके। न्याय की आस में बैठे पिता की शुक्रवार को हार्ट अटैक से मौत हो गई। आज जब पुलिस अपनी सफलता का दावा कर रही है, उसी घर में मातम पसरा है, जहां दस दिनों के भीतर दो अर्थियां उठ चुकी हैं।
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