पंजाब के लुधियाना में अमरिंदर सिंह की अदालत ने पुलिस के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि रिश्वत लेते कैमरे में कैद पुलिसकर्मियों की पहचान नहीं की गई तो अवमानना की कार्रवाई शुरू की जाएगी। अदालत ने इसे अपने आदेशों की “जानबूझकर और इरादतन अवहेलना” करार दिया। कोर्ट ने कहा कि पिछले एक साल से बार-बार निर्देश देने के बावजूद पुलिस 28 वीडियो क्लिप में दिख रहे कर्मियों की पहचान करने में विफल रही है। SHO बोले- हरसंभव कोशिश की, फिर भी पहचान नहीं
पुलिस स्टेशन डिवीजन नंबर-3 के SHO इंस्पेक्टर नरदेव सिंह कोर्ट में पेश हुए और स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर कहा कि “हर संभव प्रयास” के बावजूद वीडियो में दिख रहे लोगों की पहचान नहीं हो सकी। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में कोई जानकारी मिलने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि अदालत ने इस स्पष्टीकरण को खारिज कर दिया। कोर्ट ने बताया कि 21 अप्रैल 2025 को पंजाब के गृह विभाग को पत्र लिखकर सक्षम अधिकारी की उपस्थिति सुनिश्चित करने को कहा गया था, ताकि वीडियो में दिख रहे पुलिसकर्मियों की पहचान कराई जा सके। इसके बावजूद न तो डिवीजन नंबर-3 की पुलिस और न ही लुधियाना पुलिस कमिश्नरेट इस कार्य को पूरा कर सकी। बार-बार समय, फिर भी नतीजा शून्य
कोर्ट ने कहा कि 5 फरवरी 2025 से पुलिस लगातार समय मांगती रही है, लेकिन लगभग एक साल बाद भी वीडियो में दिख रहे कर्मियों की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई। 5 फरवरी को SHO ने “आखिरी मौका” मांगा था। इसके बाद भी स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। शुक्रवार को फिर अंतिम अवसर मांगने पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई। हाईकोर्ट में भी दिया था आश्वासन
अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि संबंधित मामले में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर सभी प्रयास करने का भरोसा दिया था। इसके बावजूद पुलिस सिर्फ स्थगन मांगती रही और कोई ठोस प्रगति नहीं दिखाई। कोर्ट ने माना कि पुलिस का यह रवैया प्रथम दृष्टया Contempt of Courts Act, 1971 की धारा 2(बी) के तहत सिविल अवमानना की श्रेणी में आता है। 20 फरवरी तक अंतिम मौका
“न्याय के हित में” अदालत ने 20 फरवरी तक अंतिम स्थगन देते हुए निर्देश दिया कि या तो 28 वीडियो क्लिप में दिख रहे पुलिसकर्मियों की पहचान की जाए या स्पष्ट रिपोर्ट दी जाए कि पहचान संभव नहीं है, ताकि मामले की सुनवाई आगे बढ़ सके। अनुपालन न होने की स्थिति में अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की चेतावनी दी गई है। साथ ही, मुख्य सचिव पंजाब को भी अलग से पत्र लिखकर हस्तक्षेप सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया है। 2019-20 का मामला, स्टिंग ऑपरेशन से हुआ खुलासा
यह मामला 2019-20 का है, जब लॉटरी कारोबारी सुभाष केट्टी ने आरोप लगाया था कि पुलिसकर्मी खुलेआम लॉटरी विक्रेताओं से रिश्वत ले रहे हैं। उन्होंने वीडियो सबूत तत्कालीन पुलिस कमिश्नर राकेश अग्रवाल को सौंपे थे। कार्रवाई न होने पर केट्टी ने हाईकोर्ट का रुख किया, जिसके बाद मार्च 2020 में FIR दर्ज हुई। अब तक 11 पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया जा चुका है और 10 के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। हालांकि केट्टी का दावा है कि स्टिंग ऑपरेशन में 28 पुलिसकर्मी कैमरे में कैद हुए थे। ऐसे में पुलिस की चयनात्मक कार्रवाई और जवाबदेही पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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