मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान हेलिकॉप्टर से उतरते हुए। (फाइल फोटो)
पंजाब के लुधियाना में साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन ने सोशल मीडिया पर पंजाब के मुख्यमंत्री से जुड़े एक हेलिकॉप्टर के इस्तेमाल को लेकर आपत्तिजनक और भ्रामक सामग्री प्रसारित करने के आरोप में कई व्यक्तियों और एक डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म के खिलाफ FIR दर्ज की
यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 353(1), 353(2) और 61(2) के तहत दर्ज किया गया है। शिकायत साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, लुधियाना के SHO इंस्पेक्टर सतबीर सिंह ने दर्ज कराई है। FIR 12 दिसंबर को दर्ज की गई थी, लेकिन पुलिस ने इसे गुप्त रखा था।
इन लोगों पर हुई FIR
FIR के अनुसार, सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल ने मिंटू गुरुसरिया, गगन रामगढ़िया, हरमन फार्मर, मनदीप मक्कड़, गुरलाल एस मान, सनाम्मू धालीवाल, माणिक गोयल, अर्जन लाइव, दीप मंगली और लोक आवाज टीवी के नाम से चल रहे खातों द्वारा अपलोड किए गए कई फेसबुक पोस्ट को चिह्नित किया।
हेलिकॉप्टर के इस्तेमाल के बारे गल दावे किए पेश
FIR में उल्लेख किया गया है कि पोस्ट में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की जापान और दक्षिण कोरिया की आधिकारिक विदेश यात्रा के दौरान हेलिकॉप्टर के इस्तेमाल के बारे में विकृत, अपुष्ट और तथ्यात्मक रूप से गलत दावे किए गए थे।
झूठी और भ्रामक कहानी बनाई
पुलिस ने कहा कि सामग्री की प्रारंभिक जांच से पता चला है कि उड़ान-ट्रैकिंग डेटा की गलत व्याख्या की गई, असंबंधित दृश्यों का चयनात्मक उपयोग किया गया और भड़काऊ टिप्पणी की गई, जिससे एक झूठी और भ्रामक कहानी बनाई गई।
पोस्ट में हेलिकॉप्टर के अनधिकृत या संदिग्ध उपयोग का सुझाव देने का प्रयास किया गया, जो कि आधिकारिक रिकॉर्ड के विपरीत है।
FIR में यह भी उल्लेख किया गया है कि नागरिक उड्डयन विभाग, पंजाब ने स्पष्ट किया है कि हेलिकॉप्टर का उपयोग एक संवैधानिक प्राधिकारी द्वारा किया गया था, जिसे संबंधित अवधि के दौरान आधिकारिक उद्देश्यों के लिए विमान का उपयोग करने के लिए विधिवत रूप से अधिकृत किया गया था।
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि ऐसी सामग्री के प्रसार से जनता को गुमराह किया जा सकता है, संवैधानिक संस्थानों में विश्वास कम हो सकता है। आधिकारिक कामकाज बाधित हो सकता है और पंजाब जैसे सीमावर्ती राज्य में सार्वजनिक व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। विवादास्पद पोस्ट के स्क्रीनशॉट FIR के साथ संलग्न किए गए हैं।
पुलिस ने कहा है कि जांच के दौरान सामग्री की प्रामाणिकता, सटीकता और उत्पत्ति की पूरी तरह से जांच की जाएगी। FIR में कथित दुष्प्रचार के प्रसार में शामिल किसी भी अतिरिक्त साजिशकर्ता या सहयोगियों की पहचान करने की गुंजाइश भी खुली रखी गई है।
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