लुधियाना की कैलवरी चर्च रंग बिरंगी लाइटों सेे सजी।
पंजाब का लुधियाना औद्योगिक नगरी है। साइकिल एवं होजरी उद्योग के लिए विश्वविख्यात है, लेकिन शहर में ऐसे कई ऐतिहासिक चर्च हैं जो दशकों पुरानी यादों को समेटे हुए हैं। इन चर्चों में आज क्रिसमस का त्योहार धूमधाम से मनाया जा रहा है।
बीती रात कैलवरी चर्च में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। 12 बजे के बाद लोगों ने आतिशबाजी भी की। ऐतिहासिक चर्च कैलवरी को रंग बिरंगी लाइटों से सजाया गया है। 1 दिसंबर से ही चर्च की सजावट शुरू कर दी जाती है। इसी तरह शहर की सभी चर्चों में आज प्रभू यीशु का गुणगान किया जाएगा।
चर्च को गुब्बारों, स्टार्स के साथ सजाया गया। एक रात पहले यानी क्रिसमस के दिन प्रभु यीशु मसीह का जन्म हुआ दिखाया गया। आज चर्चों में विशेष प्रार्थना सभा होगी।
कैलवरी चर्च में देर रात उपस्थित संगत।
शहर की ब्राउन रोड स्थित कैलवरी चर्च, फव्वारा चौक नजदीक क्राइस्ट चर्च, सराभा नगर की होली क्रास कैथोलिक चर्च सहित अन्य सभी चर्चों में आज क्रिसमस के दिन सुबह से ही विशेष प्रार्थना सभा शुरू हो गई।
छोटे बच्चों में काफी उत्साह
रेस्तरां, बेकरी ने जहां क्रिसमस से पहले केक मिक्सिंग सेरेमनी की, वहीं लेडीज क्लबों ने भी क्रिसमस थीम पर पार्टियों का आयोजन किया था। बीती रात से ही क्रिसमस को लेकर मार्केट में रौनक देखने को मिली। छोटे बच्चों में इस दिन को लेकर काफी उत्साह दिख रहा है।

चर्च की प्रार्थना सभा में उपस्थित गणमान्य।
1824 में शुरू हुई लुधियाना में कैलवरी चर्च
अंग्रेजों के जमाने के ये चर्च शहर की शान हैं और क्रिसमस के अवसर पर इसे दुल्हन की तरह सजाया गया है। पंजाब का ये पहला चर्च लुधियाना में वर्ष 1834 में शुरू हुआ। उस वक्त सतलुज दरिया के दूसरी तरफ महाराजा रंजीत सिंह का राज था, अंग्रेजों का उस वक्त लुधियाना ही आखिरी पढ़ाव था।
अंग्रेजी शासन में कई अफसर ईसाई थे, इसलिए सूबे का पहला चर्च प्रेस बिटेरियन स्थापित हुआ। आज भी यह चर्च शहर के बीचो-बीच स्थापित है। यह चर्च क्रिश्चन मेडिकल कालेज के पास ब्राउन रोड पर कैलवरी चर्च के नाम से विख्यात है।
इसके अलावा फव्वारा चौक के पास क्राइस्ट चर्च है। इसे भी वर्ष 1849 में ही अंग्रेजों के शासन काल में तैयार किया गया। पंजाब के पहले कैलवरी चर्च के निर्माण के वक्त वहां एक ही हाल होता था। इसमें एक पियानो होता था। इस पियानो के दो ही माडल थे, एक यहां और दूसरा शिमला की चर्च में था।
वक्त के साथ चर्च ने भी आधुनिकता का जामा पहना। 1877 में इस चर्च में मिशन जुबली मेमोरियल टावर बनाया गया।
1972 में प्रेसबिटेरियन चर्च को मिला कैलवरी चर्च का नाम
तीस अप्रैल 1972 में प्रेसबिटेरियन चर्च को कैलवरी चर्च का नाम दिया गया। चर्च के आधुनिकीकरण का काम वर्ष दो हजार में शुरू हुआ और दस साल तक चला। इस पर तीन करोड़ की लागत आई। कैलवरी चर्च में ही एक वैली चैपल बनी हुई है। इसे छोटे चर्च के तौर पर भी जाना जाता है।
शहर के फव्वारा चौक में वर्ष 1849 में क्राइस्ट चर्च बनाया गया। अंग्रेज कैप्टन जेई क्राउंड्स की 1849 में मौत हो गई थी, उनकी याद में यह चर्च उनके रिश्तेदारों ने तैयार कराया था।
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