328 पवित्र स्वरूपों से जुड़े मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में आज अहम सुनवाई हुई। इस दौरान पंजाब सरकार ने कोर्ट में अपना जवाब दाखिल कर दिया है। मामले को लेकर कोर्ट ने अब अगली सुनवाई की तारीख 30 जनवरी तय की है, जिस दिन इस प्रकरण पर विस्तार से बहस की जाएगी। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) इस मामले में सहयोग कर रही है, लेकिन अब तक स्वरूपों से संबंधित पूरा डेटा विशेष जांच टीम यानी एसआईटी को उपलब्ध नहीं कराया गया है। कोर्ट में इस बात पर भी सवाल उठे कि जांच में देरी क्यों हो रही है। 2020 की रिपोर्ट पर हुई कार्रवाई, याचिकाकर्ता कहते हैं कई सवाल अभी अधूरे बताया गया कि एसजीपीसी की ओर से वर्ष 2020 में ईश्वर सिंह की रिपोर्ट के आधार पर इस मामले में कार्रवाई की गई थी। हालांकि, याचिकाकर्ता पक्ष का कहना है कि उस कार्रवाई से कई अहम सवालों के जवाब अब भी अधूरे हैं, जिन्हें जांच के दायरे में लाना जरूरी है। इस मामले में जांच को और सख्त करते हुए अब आईपीसी की धारा 467, 468 और 471 को भी जोड़ दिया गया है। ये धाराएं जालसाजी, कूट रचना और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल से जुड़ी गंभीर धाराएं मानी जाती हैं, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। याचिकाकर्ता पक्ष के वकील ने कोर्ट को बताया कि वे इस मामले में एक बार फिर नई अर्जी दाखिल करेंगे, ताकि जांच प्रक्रिया को तेज किया जा सके और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय हो सके। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि 30 जनवरी को होने वाली अगली सुनवाई के दौरान इस पूरे मामले पर विस्तार से बहस की जाएगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि अब तक जांच में क्या प्रगति हुई है और एसआईटी को आवश्यक दस्तावेज कब तक सौंपे जाएंगे। फिलहाल यह मामला धार्मिक, कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर बेहद संवेदनशील बना हुआ है और आने वाली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
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