फरीदकोट में पंजाब में 328 पावन स्वरूप गुम होने के मामले में दर्ज एफआईआर की जांच के लिए एसआईटी बदलने पर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के उपाध्यक्ष परमबंस सिंह बंटी रोमाणा ने इस फैसले पर कड़ा एतराज जताते हुए राज्य की आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं। रोमाणा ने आरोप लगाया कि इस मामले में शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल व अन्य वरिष्ठ नेताओं को राजनीतिक रूप से टारगेट करने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा पहले एआईजी जगतप्रीत सिंह की अध्यक्षता में एसआईटी का गठन किया गया था, जिसने मामले की जांच शुरू की थी। उनका आरोप है कि जब उक्त एसआईटी के अधिकारियों ने सरकार के अनुसार शिअद नेताओं पर कार्रवाई से इनकार किया, तो राज्य की आप सरकार ने एसआईटी ही बदल दी। अब डीआईजी रोपड़ रेंज डॉ. नानक सिंह की अध्यक्षता में नई एसआईटी गठित की गई है। इस बदलाव को लेकर अकाली नेता ने कहा कि जांच टीम को बीच में बदलना कई तरह के संदेह पैदा करता है। उन्होंने इसे राजनीतिक हस्तक्षेप करार देते हुए कहा कि सरकार निष्पक्ष जांच के बजाय पूर्व निर्धारित एजेंडे पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि यह जांच सिर्फ और सिर्फ शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल को उलझाने की साजिश है जिसे किसी भी सूरत में सहन नहीं किया जा सकता। गौरतलब है कि 328 स्वरूप मामलों को लेकर हाल ही में अमृतसर में 16 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। केस दर्ज होने के बाद से ही इस मामले को राजनीतिक खींचतान जारी है। एसआईटी में एक अधिकारी को जानबूझकर शामिल किया जाता है-बंटी रोमाणा शिअद नेता बंटी रोमाणा ने यह भी आरोप लगाया कि पुरानी और नई दोनों एसआईटी में शामिल एक अधिकारी को जानबूझकर उन मामलों में शामिल किया जाता है, जिनमें शिअद नेताओं पर कार्रवाई करवानी होती है। उन्होंने मांग की कि मामले की जांच पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से करवाई जाए।
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