लीगल रिपोर्टर| बिलासपुर हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में प्रदेश की सभी जिला अदालतों के लिए नई प्रैक्टिस गाइडलाइन जारी की है । इसके तहत अब निष्पादन यानी एक्जीक्यूशन के नए मामलों को फाइल होने की तारीख से 6 महीने के भीतर निपटाना अनिवार्य होगा। सभी अदालतों को निष्पादन के मामलों को प्राथमिकता में रखना होगा ताकि डिक्री-धारकों को उनके कानूनी अधिकार बिना किसी देरी के मिल सकें। प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज हर महीने जिला नाजिर से रिपोर्ट लेंगे और वारंट की तामीली की प्रगति की समीक्षा करेंगे। प्रदेश की निचली अदालतों में सालों से लंबित पड़े एक्जीक्यूशन यानी डिक्री के निष्पादन के मामलों को लेकर हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। हाई कोर्ट ने राज्य की सभी जिला अदालतों के लिए नए प्रैक्टिस डायरेक्शन जारी किए हैं, जिसके तहत अब नए मामलों का निपटारा अधिकतम 6 महीने के भीतर करना अनिवार्य होगा। यह निर्देश सुप्रीम कोर्ट द्वारा पेरियम्मल विरुद्ध वी. राजामणि केस में दिए गए आदेशों के पालन में जारी किए गए हैं। हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल रजनीश श्रीवास्तव द्वारा जारी इस आदेश में कहा गया है कि डिक्री धारकों को उनके कानूनी अधिकारों का लाभ बिना किसी देरी के मिलना चाहिए। अब कोर्ट में पेश होने वाले एक्जीक्यूशन के नए मामलों को 6 महीने के भीतर निपटाना होगा। कोर्ट में लंबित सभी पुराने मामलों की पहचान कर उनका भौतिक सत्यापन किया जाएगा। हाई कोर्ट ने कहा है कि अदालती कार्यवाही में बाधा डालने या जानबूझकर देरी करने वाली याचिकाओं से सख्ती से निपटा जाए। इसके साथ ही कोर्ट स्टाफ के लिए विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किए जाएंगे, ताकि वारंट की तामीली और नीलामी जैसी प्रक्रियाएं पूरी हो सकें। जिले के प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज हर महीने लंबित मामलों और उनकी प्रगति की समीक्षा करेंगे। कुर्की और कब्जे के वारंट की तामीली में होने वाली देरी को रोकने के लिए जिला नाजिर से हर महीने रिपोर्ट मांगी जाएगी। इसके अलावा सुनवाई के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और केस की ट्रैकिंग के लिए जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का अधिकतम उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं।
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