हरियाणा में राज्यसभा चुनाव के लिए बिसात बिछने लगी है। भाजपा के राज्यसभा सदस्य रामचंद्र जांगड़ा व किरण चौधरी का कार्यकाल अप्रैल के महीने में खत्म हो रहा है। ऐसे में मार्च में चुनाव होने की संभावना है। चुनाव के लिए अभी से दावेदारों ने गोटियां बिछानी शुरू कर दी है। इस बार वोटों का आंकड़ा ऐसा है कि भाजपा-कांग्रेस के पास एक-एक सीट आना तय है। हालांकि भाजपा की पूरी कोशिश रहेगी कि दूसरी सीट भी उसके कब्जे में आए।
इस बार भाजपा से ज्यादा लोगों की दिलचस्पी यह जानने में है कि इस बार कांग्रेस से राज्यसभा का उम्मीदवार कौन होगा। कांग्रेस से कई नामों की चर्चा है, मगर सूची में सबसे ऊपर नाम हरियाणा के प्रभारी बीके हरिप्रसाद का है। बंगलूरू के बीके हरि प्रसाद फिलहाल न तो लोकसभा के सदस्य हैं और न ही राज्यसभा के। जब हुड्डा राज्य के सीएम थे तो उस दौरान भी वह हरियाणा कांग्रेस के प्रभारी रह चुके हैं। हरियाणा के सभी शीर्ष नेताओं के साथ उनकी अच्छी बनती है।
ऐसे में उनके नाम पर हरियाणा में किसी को आपत्ति भी नहीं होगी। वहीं, हरियाणा से बाहर के नेताओं में जयराम रमेश व पवन खेड़ा के नाम पर फुसफुसाहट सुनने को मिल रही है। उधर, हरियाणा से दो नामों को हाईकमान के पास भेजा गया था, जिसमें कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष उदयभान व दूसरा नाम राव दान सिंह का था। यदि केंद्र से भेजे गए नाम पर कोई अड़चन आती है तो प्रदेश के इन नेताओं पर विचार किया जा सकता है।
उधर, भाजपा में भी दावेदारों के नाम पर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि भाजपा की ओर से हर बार नाम चौकाने वाला रहा है। मगर इस बार संभावना कुछ और है। दरअसल अपनी कार्यशैली की वजह से मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की हाईकमान में अहमियत बढ़ी है। ऐसे में यह भी चर्चा है कि राज्य सभा का उम्मीदवार सीएम नायब सिंह सैनी की पसंद का होगा। हालांकि जिन नामों की चर्चा चल रही है, उन सभी ने लॉबिंग तेज कर दी है। इनमें कैप्टन अभिमन्यु व कुलदीप बिश्नोई का नाम शामिल है। दोनों ही अपने स्तर पर काफी प्रयास कर रहे हैं। लगातार हाईकमान व मुख्यमंनत्री नायब सिंह सैनी के साथ मुलाकात कर रहे हैं। उधर, किरण चौधरी भी पूरी कोशिश में है कि उनके नाम पर दोबारा से सहमति बन जाए। हालांकि पार्टी उनके ऊपर दोबारा से दांव लगाने पर हिचकेगी।
क्या है राज्यसभा का गणित
राज्यसभा की सीट जीतने के एक उम्मीदवार को 31 वोट चाहिए होंगे। ऐसे में पूरी संभावना है कि भाजपा व कांग्रेस के खाते में एक-एक सीट आएगी। वर्तमान में कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं, जबकि भाजपा के पास 47 विधायक हैं और तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन प्राप्त है। यदि भाजपा को दूसरी सीट तभी जीत सकती है, जब सात विधायक क्रास वोटिंग करें, जो कि काफी मुश्किल है। वहीं, पार्टी सूत्रों का कहना है कि यदि कांग्रेस से बीके हरि प्रसाद आते हैं तो भाजपा अपना उम्मीदवार नहीं खड़ा करेगी, क्योंकि हरिप्रसाद के समर्थन में कांग्रेस के सभी विधायक एक मत हो सकते हैं।
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