कैथल। जिले में बाढ़ से सुरक्षा और जल निकासी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सिंचाई विभाग ने बड़े स्तर पर कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत जिले में 34 बाढ़ नियंत्रण परियोजनाओं पर 44 करोड़ 17 लाख रुपये से अधिक की राशि खर्च की जाएगी। इन परियोजनाओं के लिए मुख्यालय से बजट स्वीकृत हो चुका है और कार्यों को चरणबद्ध ढंग से पूरा किया जाएगा।
इन विकास कार्यों में ड्रेन सुधार, बांधों की मजबूती, स्टोन पिचिंग और जल निकासी से जुड़े अन्य आवश्यक कार्य शामिल हैं। क्योड़क, रत्ताखेड़ा और चीका क्षेत्र को विशेष रूप से इन योजनाओं में शामिल किया गया है। वर्ष 2025-26 के लिए हरियाणा राज्य आपदा प्रतिक्रिया (एचएसडीआर) और बाढ़ नियंत्रण बोर्ड (एफसीबी) की बैठकों में इन सभी परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान की गई है।
अधिकारियों के अनुसार इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को सुरक्षित बनाना और मानसून के दौरान होने वाले नुकसान को न्यूनतम करना है। परियोजनाओं के पूरा होने से गांवों और शहरों में जलभराव की समस्या कम होगी, किसानों की फसल को नुकसान से बचाया जा सकेगा तथा लोगों की संपत्ति और जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। प्रशासन का दावा है कि कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान रखा जाएगा, ताकि सरकारी धन का सही और प्रभावी उपयोग हो सके।
सभी परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र शुरू कराया जाएगा, ताकि मानसून से पहले अधिकतर कार्य पूरे किए जा सकें। इन योजनाओं से न केवल बाढ़ और जलभराव की समस्या कम होगी, बल्कि किसानों की फसल, गांवों की आबादी और सड़क नेटवर्क को भी बेहतर सुरक्षा मिलेगी। -गुरविंदर सिंह दयोल, कार्यकारी अभियंता
चार बड़ी परियोजनाओं को मिली हरी झंडी
संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। हर साल बरसात के दौरान उत्पन्न होने वाले जलभराव और बाढ़ संकट से निपटने के लिए सरकार ने ड्रेन सुधार, बांध मजबूती और पुल निर्माण से जुड़ी चार अहम परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की है। इन परियोजनाओं पर कुल मिलाकर लगभग 6 करोड़ 72 लाख रुपये से अधिक की राशि खर्च की जाएगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों को स्थायी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
सबसे महत्वपूर्ण योजना के तहत ग्रीन लिंक ड्रेन पर पाइपलाइन बिछाने और उससे संबंधित अन्य संरचनाओं के निर्माण के लिए 9 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इस परियोजना के पूरा होने से ड्रेन की जल वहन क्षमता बढ़ेगी और बरसात के मौसम में शहर व गांवों में पानी जमा होने की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो सकेगा।
इसी क्रम में सिवाली गांव में बाढ़ सुरक्षा योजना के तहत स्टोन पिचिंग और बांध की मजबूती का कार्य कराया जाएगा, जिस पर 85.77 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इससे गांव के आसपास बने बंड को मजबूती मिलेगी और खेतों में पानी भरने की समस्या से राहत मिलेगी।
वहीं कैथल ड्रेन पर आरडी-41,000 पर पुल निर्माण के लिए 1.50 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। पुल के निर्माण से ग्रामीणों को आवागमन में सुविधा मिलेगी और बरसात के दौरान टूटने वाले अस्थायी रास्तों की समस्या समाप्त होगी। इसके अलावा सिहली और रत्ताखेड़ा गांव के पास चंगरा बंड के स्टोन वर्क और मजबूतीकरण पर 4.28 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिससे यह बांध बाढ़ के पानी से क्षेत्र की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाएगा।
रिंग बांध व टो वॉल ध्वस्त होने से मची थी तबाही
संवाद न्यूज एजेंसी
गुहला-चीका। वर्ष 2023 के जुलाई माह में घग्गर नदी में आई बाढ़ के कारण जहां कई जगहों से रिंग बांध टूट गया था। वहीं, इस पानी ने गुहला क्षेत्र के बचाव के लिए बनाई गई टो वॉल को भी ध्वस्त कर दिया था। टो वॉल टूटने के बाद लाखों क्यूसेक पानी गुहला क्षेत्र में फैल गया था। इससे क्षेत्र में भारी तबाही हुई थी।
अब फिर से बाढ़ क्षेत्र के बचाव की चर्चा चल रही है, लेकिन सरस्वती डिविजन टूटी टो वॉल को पक्का करने की बजाए सिर्फ योजनाएं बनाने में ही उलझा रहा, तीन करोड़ का बजट भी पास कराया गया पर हालात अभी तक सुधरे नहीं है। वर्ष 2025 में सिंचाई विभाग ने 1645 लाख रुपये के 12 काम करवाए थे। यदि इस बार भी घग्गर नदी में पिछले वर्ष की तरह भारी मात्रा में पानी आया तो मिट्टी के थैलों से पाटे गए टो वॉल के हिस्से शायद ज्यादा समय तक टिक नहीं पाएंगे। ऐसे में एकबार फिर क्षेत्रवासियों को बाढ़ की मार झेलनी पड़ सकती है। व्यवस्था में सुधार का इंतजार जारी है।
पहले जो टो वॉल बनाई गई थी, उसके ऊपरी हिस्सों में सरिया नहीं डाला गया था। इसके चलते वह पानी का दबाव नहीं झेल पाई और बाढ़ की वजह से किसानों का काफी नुकसान हुआ था। -दिग्विजय शर्मा, एक्सईएन सरस्वती डिविजन नंबर-3 कुरुक्षेत्र।
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