आलू की खेती हाथरस जिले के किसानों की आय का प्रमुख आधार है, लेकिन इस बार झुलसा रोग ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया है। यह रोग तेजी से फैल रहा है। अनुमान के मुताबिक लगभग 65 प्रतिशत फसल इसकी चपेट में आ चुकी है। घने कोहरे, पाले और दिन भर रहने वाली नमी से इस रोग को बढ़ा दिया है।
जिले में लगभग 52 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में आलू की बुवाई की गई है, इसमें अगैती और पिछैती दोनों फसलें शामिल हैं। किसान झुलसा रोग से फसल को बचाने के लिए लगातार दवाओं का छिड़काव कर रहे हैं, लेकिन मौसम साफ न होने के कारण रोग पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है।
किसान गंभीर सिंह, रामवीर सिंह और बबलू चौधरी का कहना है कि उनकी 3797 आलू की फसल करीब 50-55 दिन की है, इसमें झुलसा रोग लग चुका है। एक बार दवा का छिड़काव करने के बाद भी रोग थम नहीं रहा है। पहले ही बाजार में आलू के दाम गिर चुके हैं और अब फसल खराब होने की चिंता है।
आलू में अगैती और पिछैती झुलसा रोग होता है। इस वक्त आलू बड़ा हो रहा है, इसलिए पिछैती झुलसा का प्रकोप ज्यादा है। इसमें पत्तियों पर पानी जैसे धब्बे और बाद में काले धब्बे पड़ते हैं, जिससे पत्तियां मुरझा जाती हैं। पैदावार पर असर पड़ता है। बचाव के लिए मैटलेक्सिल और मैंकोजे का छिड़काव सही समय पर करते रहना चाहिए। खेत में पानी न रुकने दें।-विकास कुमार यादव, कृषि वैज्ञानिक।
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