‘दोपहर 2.10 बजते ही राजस्थान हाईकोर्ट में बहुत बड़ा धमाका होने वाला है।’
‘SMS स्टेडियम में हमने बम प्लांट कर दिया है, बड़े धमाके के लिए तैयार रहना’
स्कूल, कॉलेज, कोर्ट, स्टेडियम, अस्पताल, होटल से लेकर धार्मिक स्थलों को बम से उड़ाने की धमकियों का सिलसिला थम नहीं रहा। बीते एक साल में 61 से अधिक धमकी भरे ई-मेल और फोन आ चुके हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है, धमकी देने वाले अबतक पकड़े क्यों नहीं गए? राजस्थान पुलिस और इंटेलिजेंस एजेंसियों को छकाने वाले ये बदमाश कौनसी तकनीक का सहारा ले रहे हैं? पुलिस क्यों बेबस है? सवालों के जवाब ढूंढने के लिए हमने एक्सपर्ट की मदद ली। पढ़िए ये रिपोर्ट…
वीपीएन की मदद से मेल कर रहे बदमाश, ट्रेस करना नहीं आसान
दिल्ली में बैठे एक सीनियर आईपीएस अधिकारी ने बताया कि यह धमकी भरे ई-मेल देश के कोने-कोने में आ रहे हैं। इसके लिए आरोपी वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) का सहारा ले रहे हैं।
यह एक ऐसा टूल है, जो आपको प्राइवेट नेटवर्क बनाने में मदद करता है। भले ही आप जियो, एयरटेल, BSNL या कोई भी इंटरनेट सेवा का इस्तेमाल कर रहे हों।
VPN का प्रमुख काम है नेटवर्क ट्रैफिक को एन्क्रिप्ट करना। यानी आपके आईपी इंटरनेट प्रोटोकॉल एड्रेस और लोकेशन को छिपाना। इसे इस्तेमाल करने वाले की लोकेशन से लेकर तमाम जानकारियां छिप जाती हैं।
ई-मेल आईडी के लिए आमतौर पर लोग जी-मेल, याहू, आउटलुक जैसे कई डोमेन का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन कई सर्वर ऐसे भी हैं जहां कुछ समय के लिए ई-मेल बनाकर उसे आसानी से डिलीट किया जा सकता है।
धमकी भेजने वाले अधिकांश शातिर ऐसे ही सर्वर पर फर्जी ई-मेल आईडी बनाते हैं। इसके लिए किसी मोबाइल नंबर, ओटीपी या लोकेशन की जरूरत नहीं होती।

साइबर एक्सपर्ट टीमें जब यह जानने की कोशिश करती हैं कि मेल कहां से भेजा गया तो वीपीएन नेटवर्क का आईपी एड्रेस मिलता है।
मान लीजिए किसी शातिर ने आउटलुक पर फर्जी ई-मेल आईडी तैयार कर ली। वो इसके लिए वीपीएन की आईडी से इंटरनेट चलाता है। ई-मेल आईडी में लॉगइन कर धमकी भेज देता है।
जब पुलिस धमकी वाली मेल आईडी को रिवर्स ट्रैक करती है तो आउटलुक के सर्वर तक पहुंचती है। आउटलुक बताता है कि उसके पास कौनसे आईपी एड्रेस से मेल आईडी की रिक्वेस्ट आई थी।
पुलिस जब उस आईपी एड्रेस पर जाती है तो विदेश में चल रहे वीपीएन का आईपी एड्रेस मिलता है। ये मेल आईडी किसने बनाई, कहां बैठकर बनाई, कौनसे मोबाइल, कंप्यूटर या लेपटॉप पर बनाई, ये जानकारियां वीपीएन नेटवर्क पर नहीं मिलती।
जब तक वीपीएन पुलिस को उस आईपी एड्रेस की जानकारी नहीं देगा, तब तक मेल करने वाले तक एजेंसियां नहीं पहुंच सकती।

एक स्कूल को बम से उड़ाने की धमकी से भरा ई-मेल।
वीपीएन कंपनियों के सर्वर विदेश में, डेटा मिलना आसान नहीं
एक्सपर्ट के अनुसार वीपीएन सर्विस देने वाली कंपनियों के सर्वर विदेश में होते हैं। कुछ चार्ज लेकर आपको वीपीएन सर्वर देते हैं। जिससे फेक मेल करने वाला खुद के इंटरनेट पर जाने से पहले उनके सर्वर पर जाता है।
पुलिस या जांच एजेंसी मेल करने वाला का पता लगाने के लिए जैसे ही वीपीएन सर्वर पर जाती है, वहां यूजर का IP एड्रेस हाइड मिलता है। केवल वीपीएन की आईडी दिखाई देती है।
जब तक वीपीएन प्रोवाइडर कंपनी डेटा नहीं देगी तब तक मेल करने वाली पहचान मुश्किल होती है। इनसे डेटा मंगवाने के लिए कोर्ट के आदेश, सेंट्रल एजेंसियों की मंजूरी लेना बहुत जरूरी होता हैं।
कई बार देखा गया है कि वीपीएन पाकिस्तान-चाइना से चल रहे हैं ऐसे में उनसे डेटा लेना आसान नहीं होता।
साइबर एक्सपर्ट मुकेश चौधरी बताते हैं- अगर दोनों देशों में म्यूचुअल लीगल असिस्टेंट की संधि होती है तो क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन में एक दूसरे को मदद करते हैं। इसकी प्रक्रिया काफी लंबी होती है।

तो थ्रेट मेल मिलने के बाद एजेंसियां क्या करती है?
जैसे ही थ्रेट मेल मिलती है, उसे तत्काल सोशल मीडिया पर ट्रैक करना शुरू कर दिया जाता है।
यह कोशिश की जाती है कि ई-मेल के बारे में और कोई जानकारी सोशल मीडिया से मिल जाए।
जैसे- मेल में लिखे गए शब्द हूबहू सोशल मीडिया पर किसी आईपी एड्रेस पर रन तो नहीं कर रहे, क्योंकि कई बार धमकी देने वाले अलग-अलग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते है।
लेकिन पिछले कुछ समय से इस लाइन पर भी कोई मदद नहीं मिली है।
वीपीएन सर्वर से आए धमकी भरे मेल ट्रेस नहीं हो पाते, ऐसे में पुलिस के पास सर्च ऑपरेशन के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं बचता।

राजस्थान हाईकोर्ट को 6 बार बम से उड़ाने की धमकी मिल चुकी है।
IIT से प्रशिक्षित साइबर कमांडों की टीमें कर रहीं प्रयास
राजस्थान में साइबर अपराध से निपटने के लिए राजस्थान पुलिस ने अपने साइबर कमांडों तैयार किए हैं। ये 17 कमांडो आईआईटी कानपुर में प्रशिक्षण लेकर पुलिस मुख्यालय में सेवा दे रहे हैं।
ये टीम ऑनलाइन, साइबर फ्रॉड से संबंधित अपराध पर काम कर रही है। लेकिन इस तरह की धमकियों को लेकर अभी तक कोई स्ट्रॉन्ग सिस्टम मौजूद नहीं है। पुलिस को इसके लिए नए सॉफ्टवेयर की जरूरत है, जिससे उनकी टीम प्रभावी रूप से काम कर सके।
राजस्थान हाईकोर्ट को बढ़ाई जाएगी सुरक्षा
राजस्थान हाईकोर्ट को पिछले चार दिन से लगातार मेल के द्वारा धमकी मिल रही है। जयपुर कमिश्नरेट, एटीएस और पुलिस मुख्यालय की टीम ने हाईकोर्ट में एक मीटिंग की हैं।
जिस के परिणाम स्वरूप कोर्ट को हर दिन सुबह दो घंटे सर्च किया जाएगा। कोर्ट में आने से पहले सभी की जांच की जाएगी। जिससे अगर कोर्ट के समय में किसी भी प्रकार कोई धमकी मिलती है तो पैनिक ना फैले।

सबसे ज्यादा कहां होता है वीपीएन का इस्तेमाल?
ईस्टर्न यूरोप के कई देशों में वीपीएन का उपयोग किया जाता है। सबसे अधिक वीपीएन का उपयोग विश्व में (यूएई) संयुक्त अरब अमीरात और कतर में किया जाता है, क्योंकि वहां इंटरनेट सेवाओं पर कई तरह की पाबंदियां हैं।
प्राइवेसी के लिए लोग वहां वीपीएन का अधिक उपयोग करते हैं। सिंगापुर पहला देश है जहां पर 80 प्रतिशत लोग साइबर सुरक्षा के लिए वीपीएन का उपयोग करते हैं। अमेरिका, तुर्की, रूस, ब्राजील में वीपीएन का जम कर उपयोग हो रहा है।
जितना महंगा वीपीएन उतना अधिक सेफ
वीपीएन 4 डॉलर 30 दिन के हिसाब से मिलना शुरू होता है। कोई भी इसे डाउनलोड करके उपयोग में ले सकता है। वीपीएन का महंगा प्लान लेने के फायदा यह है कि वीपीएन मिनटों में आप की फेक लोकेशन को एक देश से दूसरे देश पहुंचा देता है, जिससे एजेंसियां आपकी लोकेशन ट्रेस कर ही नहीं पाती।
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सुबह करीब 9.43 बजे रजिस्ट्रार सीपीसी को मेल आया था। धमकी की जानकारी मिलते ही पुलिस ने तुरंत बिल्डिंग खाली करा ली। मौके पर बम स्क्वॉड को बुलाकर जांच शुरू की गई। पूरी खबर पढ़िए…
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