पहाड़ों में पाई जाने वाली एक खास जड़ी-बूटी गानन को इसी तरह की समस्याओं में फायदेमंद माना जाता है. गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि यह जड़ी-बूटी जंगलों में अपने आप उगती है. पुराने समय में जब अस्पताल और दवाइयां आसानी से उपलब्ध नहीं थीं, तब लोग प्राकृतिक जड़ी-बूटियों पर ही निर्भर रहते थे. गानन भी उन्हीं में से एक है, जिसका इस्तेमाल पेट से जुड़ी दिक्कतों में किया जाता रहा है.
पहाड़ों में पाई जाने वाली एक खास जड़ी-बूटी गानन को इसी तरह की समस्याओं में फायदेमंद माना जाता है. गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि यह जड़ी-बूटी जंगलों में अपने आप उगती है. पुराने समय में जब अस्पताल और दवाइयां आसानी से उपलब्ध नहीं थीं, तब लोग प्राकृतिक जड़ी-बूटियों पर ही निर्भर रहते थे. गानन भी उन्हीं में से एक है, जिसका इस्तेमाल पेट से जुड़ी दिक्कतों में किया जाता रहा है.
गानन को सुखाकर बनाते हैं औषधि
बुजुर्गों के अनुसार, गानन के सूखे हिस्से को पहले अच्छी तरह धूप में सुखाया जाता है. फिर उसे पीसकर बारीक चूर्ण बना लिया जाता है. इस चूर्ण को गुनगुने पानी के साथ लिया जाता है. कुछ लोग इसका हल्का काढ़ा बनाकर भी पीते हैं. माना जाता है कि इससे गैस, अपच और पेट दर्द में राहत मिलती है. कई लोगों का कहना है कि यह पाचन शक्ति को मजबूत करने में मदद करती है और पेट की जलन को कम करती है. पहाड़ी इलाकों में आज भी जब किसी को हल्की-फुल्की पेट की समस्या होती है, तो सबसे पहले घर के बड़े-बुजुर्ग यही नुस्खा बताते हैं. यह उनके अनुभव और परंपरा का हिस्सा है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ता आया है.
वैद्य की सलाह पर करते हैं प्रयोग
इस बारे में स्थानीय निवासी आसमती कहती हैं, “हमारे गांव में गानन का इस्तेमाल कई सालों से होता आ रहा है. जब भी किसी को पेट दर्द या गैस होती है, तो बड़े लोग यही जड़ी-बूटी देते हैं. मैंने भी इसे लिया है और मुझे आराम मिला. लेकिन हम हमेशा मात्रा का ध्यान रखते हैं और जरूरत पड़े तो वैद्य से सलाह जरूर लेते हैं. हालांकि, यह समझना भी जरूरी है कि हर व्यक्ति की शरीर प्रकृति अलग होती है. इसलिए किसी भी जड़ी-बूटी का सेवन करने से पहले जानकारी लेना जरूरी है. अगर समस्या ज्यादा हो या लंबे समय तक बनी रहे, तो डॉक्टर या आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से सलाह जरूर लेनी चाहिए. घरेलू उपाय मददगार हो सकते हैं, लेकिन सही जानकारी और सावधानी के साथ ही उनका उपयोग करना चाहिए.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें
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