Askot wildlife sanctuary : अस्कोट वन्यजीव अभयारण्य उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में है. यह अभयारण्य मुख्य रूप से कस्तूरी मृग के संरक्षण के लिए जाना जाता है. यहां हिम तेंदुआ, तेंदुआ, भालू और कई दुर्लभ पक्षी पाए जाते हैं. घने जंगल, ऊंचे पहाड़ और समृद्ध जैव विविधता इसे विशेष बनाती है. यहां की ऊंचाई 600 मीटर से लेकर 6900 मीटर तक है, जिसकी वजह से कई प्रकार की जलवायु और वनस्पति पाई जाती है. कई छोटे स्तनधारी जीव भी पाए जाते हैं, जो इस पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखते हैं.
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित अस्कोट वन्यजीव अभयारण्य हिमालयी क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता का एक अनोखा उदाहरण है. यह अभयारण्य न केवल दुर्लभ वन्यजीवों का सुरक्षित घर है, बल्कि स्थानीय संस्कृति, पहाड़ी जीवनशैली और प्रकृति के गहरे संबंध को भी दर्शाता है. इसे मुख्य रूप से कस्तूरी मृग (Musk Deer) के संरक्षण के लिए जाना जाता है.

अस्कोट वन्यजीव अभयारण्य पिथौरागढ़ से लगभग 54 किलोमीटर दूर, अस्कोट कस्बे के आसपास फैला हुआ है. इसकी स्थापना वर्ष 1986 में की गई थी. यह अभयारण्य भारत-नेपाल सीमा के निकट है और इसका क्षेत्रफल लगभग 600 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है.<br />यहां की ऊंचाई 600 मीटर से लेकर 6900 मीटर तक है, जिसके कारण यहां विभिन्न प्रकार की जलवायु और वनस्पति पाई जाती है.

अस्कोट वन्यजीव अभयारण्य की स्थापना का मुख्य उद्देश्य दुर्लभ और लुप्तप्राय वन्यजीवों का संरक्षण करना है, विशेष रूप से कस्तूरी मृग, जो अवैध शिकार के कारण संकट में हैं. इस अभयारण्य का प्रमुख संरक्षित जीव है. यह क्षेत्र जैव विविधता को बनाए रखने, वनों की रक्षा करने और पर्यावरण संतुलन को सुरक्षित रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
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अस्कोट अभयारण्य कई प्रकार के वन्यजीवों का घर है. इनमें शामिल हैं कस्तूरी मृग (Musk Deer) सबसे प्रमुख और दुर्लभ प्रजाति, हिम तेंदुआ (Snow Leopard), हिमालयी काला भालू, तेंदुआ, भारल (नीली भेड़), घोरल और काकड़. इनके अलावा यहां कई छोटे स्तनधारी जीव भी पाए जाते हैं, जो इस पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखते हैं.

यह अभयारण्य पक्षी प्रेमियों के लिए भी किसी स्वर्ग से कम नहीं है. यहां 200 से अधिक पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें शामिल हैं- मोनाल (राज्य पक्षी), हिमालयी ग्रिफन, तीतर, बाज और चील की विभिन्न प्रजातियां. सुबह और शाम के समय पक्षियों की आवाजें पूरे जंगल को जीवंत बना देती हैं.

हालांकि यह अभयारण्य पूरी तरह से पर्यटन केंद्र नहीं है, फिर भी प्रकृति प्रेमी, शोधकर्ता और फोटोग्राफर यहां आते हैं. यहां आने का सबसे अच्छा समय अप्रैल से जून और सितंबर से दिसंबर माना जाता है. पर्यटकों को यहां वन विभाग के नियमों का पालन करना आवश्यक है, ताकि वन्यजीवों को किसी प्रकार की परेशानी न हो.

अस्कोट वन्यजीव अभयारण्य में वनस्पति की विविधता देखने को मिलती है. यहां साल और चीड़ के वन, बांज, बुरांश और देवदार के जंगल, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अल्पाइन घास के मैदान देखने को मिलते हैं. मौसम के अनुसार यहां का रंग-रूप बदलता रहता है. वसंत में बुरांश के लाल फूल, मानसून में हरियाली और सर्दियों में बर्फ से ढके पहाड़ यहां की सुंदरता को और बढ़ा देते हैं.

अस्कोट वन्यजीव अभयारण्य को कई चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है. जैसे- अवैध शिकार, वन कटान, जलवायु परिवर्तन और मानव-वन्यजीव संघर्ष. इन समस्याओं से निपटने के लिए वन विभाग, स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों का संयुक्त प्रयास आवश्यक है.
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