चंडीगढ़ पीजीआई एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर के विशेषज्ञों ने हालिया अध्ययन में पाया है कि शिशुओं के मस्तिष्क विकास में विटामिन बी12 की अहम भूमिका है। यह शोध पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी जर्नल में प्रकाशित हुआ है।
अध्ययन में विटामिन बी12 की कमी से ग्रस्त 141 शिशुओं का मूल्यांकन एमआरआई और मानकीकृत विकासात्मक परीक्षणों के माध्यम से किया गया। परिणामों से स्पष्ट हुआ कि कमी के कारण बच्चों में विकास में देरी, सुस्ती, एनीमिया, माइलस्टोन का खोना और गंभीर मामलों में त्वचा का काला पड़ना व बालों का हल्का होना जैसे लक्षण दिखे। लगभग 60 प्रतिशत शिशुओं में मस्तिष्क आयतन में कमी और सिर की वृद्धि प्रभावित पाई गई।
उपचार के बाद बच्चों में सतर्कता और विकास में तेज सुधार देखा गया। हालांकि शोधकर्ताओं ने चेताया कि देर से हस्तक्षेप होने पर सीखने, बुद्धि और व्यवहार पर दीर्घकालिक प्रभाव रह सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार भारत में शाकाहार की व्यापकता के कारण विटामिन बी12 की कमी एक बड़ी पोषण संबंधी चुनौती है।
केवल स्तनपान करने वाले शिशु, विशेषकर उन माताओं के जिनमें बी12 की कमी है, अधिक जोखिम में हैं। छह माह के बाद भी यदि मां में कमी बनी रहे तो यह शिशु के मस्तिष्क विकास पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। अध्ययन ने यह स्पष्ट किया है कि विटामिन बी12 की कमी मानसिक विकास में बाधा का एक रोके जाने योग्य कारण है।
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