चंडीगढ़ पीजीआई को मरीजों की बेहतर देखभाल के लिए बड़ी राहत मिली है। नई दिल्ली में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की सचिव पुन्या सलिला श्रीवास्तव की अध्यक्षता में हुई स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी (एसएफसी) की बैठक में पीजीआई के लिए 82 नए पदों को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही न्यूरोसाइंसेज सेंटर में अत्याधुनिक 256-स्लाइस सीटी स्कैनर लगाने की भी स्वीकृति दी गई है। यह फैसला उत्तर भारत के लाखों मरीजों के लिए बड़ी राहत साबित होगा। 82 नए पदों से मजबूत होगी स्वास्थ्य सेवाएं मंजूर किए गए 82 पदों में फैकल्टी, नॉन-फैकल्टी और सीनियर रेजिडेंट के पद शामिल हैं। इससे अस्पताल की क्लीनिकल और शैक्षणिक क्षमता में बड़ा इजाफा होगा। नई नियुक्तियों से डॉक्टरों पर काम का दबाव कम होगा, मरीज-डॉक्टर अनुपात बेहतर होगा और इलाज की गुणवत्ता में सुधार आएगा। बैठक में पीजीआईएमईआर के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने मंत्रालय का आभार जताते हुए कहा कि यह मंजूरी समय पर मिली बड़ी सहायता है, जिससे न्यूरो-इमरजेंसी सेवाओं को मजबूती मिलेगी। बैठक की सबसे बड़ी घोषणा न्यूरोसाइंसेज सेंटर के लिए 256-स्लाइस सीटी स्कैनर की मंजूरी रही। यह आधुनिक मशीन जटिल न्यूरोलॉजिकल, न्यूरोसर्जरी, स्ट्रोक और ट्रॉमा मामलों की तेज और सटीक जांच में मदद करेगी। नई मशीन लगने से जांच का समय घटेगा और मरीजों को लंबी प्रतीक्षा से राहत मिलेगी। साथ ही इमरजेंसी मामलों में तुरंत और सटीक निदान संभव हो सकेगा। मरीजों संख्या को देखते हुए फैसला पीजीआई में उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों से रोज बड़ी संख्या में रेफरल मरीज पहुंचते हैं। लगातार बढ़ती भीड़ को देखते हुए मानव संसाधन बढ़ाने और आधुनिक उपकरण लगाने का निर्णय लिया गया है। बैठक में प्रशासनिक, वित्तीय और इंजीनियरिंग से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। अस्पताल के बुनियादी ढांचे के विस्तार, स्टाफ बढ़ाने और उपकरणों के आधुनिकीकरण पर विस्तार से चर्चा की गई। इन फैसलों से पीजीआईएमईआर की क्षमता और मजबूत होगी। नए पदों और अत्याधुनिक मशीन के साथ संस्थान मरीजों को और अधिक सुलभ, तेज और गुणवत्तापूर्ण उपचार देने में सक्षम होगा। यह निर्णय पीजीआईएमईआर को उत्तर भारत के प्रमुख रेफरल चिकित्सा संस्थान के रूप में और मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
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