IGIMS Unique Surgery Patna: संस्थान में पहली बार आधुनिक एंडोस्कोपिक तकनीक के जरिए बिना किसी बड़ी सर्जरी के बड़ी रेक्टल पॉलिप का सफल इलाज किया गया. यह उपचार एंडोस्कोपिक म्यूकोसल रिसेक्शन (EMR) तकनीक से 8 जनवरी को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ.
मरीज को थी यह समस्या
आईजीआईएमएस के चिकित्सा अधीक्षक एवं सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. मनीष मंडल ने बताया कि 45 वर्षीय एक पुरुष मरीज पेट और मलाशय में दर्द की शिकायत लेकर गैस्ट्रोसर्जरी ओपीडी में आए थे. जांच के दौरान हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्ट में मरीज को ट्यूब्युलर एडेनोमा विद लो-ग्रेड डिस्प्लेसिया नामक पॉलिप पाई गई. यह आगे चलकर कैंसर में बदल सकती थी.
संस्थान के लिए बड़ी उपलब्धि
डॉ. मंडल ने बताया कि एमआरआई जांच में यह स्पष्ट हुआ कि पॉलिप केवल आंत की ऊपरी परत तक ही सीमित थी और अंदर की गहरी परतों में नहीं फैली थी. इसके बाद मरीज को एंडोस्कोपी यूनिट में रेफर किया गया. यहां बिना बड़ी सर्जरी किए EMR तकनीक से पॉलिप को पूरी तरह निकाल दिया गया. इस जटिल प्रक्रिया को गैस्ट्रो मेडिसिन विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. राहुल कुमार ने एंडोस्कोपी टीम के सहयोग से सफलतापूर्वक अंजाम दिया. उन्होंने बताया कि इलाज के दौरान किसी तरह की जटिलता नहीं हुई और पॉलिप को पूरी तरह हटाकर दोबारा जांच के लिए भेज दिया गया.
क्या होता है रेक्टल पॉलिप
रेक्टल पॉलिप मलाशय (रेक्टम) की अंदरूनी परत पर बनने वाली एक गांठ होता है. रेक्टम बड़ी आंत का अंतिम हिस्सा होता है, जहां मल जमा होता है और बाहर निकलता है. जब इस हिस्से की कोशिकाएं सामान्य से अधिक बढ़ने लगती हैं, तो वहां पॉलिप बन जाता है. शुरुआत में रेक्टल पॉलिप छोटा और बिना लक्षण के हो सकता है, लेकिन समय के साथ इसका आकार बढ़ सकता है. बड़े पॉलिप होने पर मल त्याग के दौरान दर्द, मल में खून आना, पेट या मलाशय में भारीपन और शौच की आदतों में बदलाव जैसी समस्याएं हो सकती हैं. सभी रेक्टल पॉलिप खतरनाक नहीं होते, लेकिन कुछ पॉलिप आगे चलकर कैंसर में बदल सकते हैं. इसलिए समय पर जांच और इलाज बेहद जरूरी होता है.
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