बलथरी में महावीर मंदिर और अयोध्या से आए पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शिवलिंग की विधिवत पूजा-अर्चना की. इसके बाद आरती की गई और राम नाम वाले केसरिया गमछा दिखाकर शिवलिंग को आगे की यात्रा के लिए रवाना किया गया.
17 जनवरी को होगा भव्य स्थापना समारोह
महावीर मंदिर के सचिव सायण कुणाल ने बताया कि शिवलिंग 7 जनवरी तक केसरिया पहुंच जाएगा, जबकि 15 जनवरी तक केसरिया के कैथवलिया स्थित विराट रामायण मंदिर में स्थापना से जुड़ी सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएंगी. 17 जनवरी को पांच प्रमुख तीर्थों के जल से विशेष अभिषेक के बाद शिवलिंग की विधि-विधान से स्थापना की जाएगी. शिवलिंग के अभिषेक के लिए हरिद्वार, प्रयागराज, गंगोत्री, कैलाश मानसरोवर और सोनपुर समेत पांच प्रमुख तीर्थों का जल मंगाया गया है. विशेष बात यह है कि यह शिवलिंग सहस्त्रलिंगम है, यानी इसके जलाभिषेक को 1008 शिवलिंगों के जलाभिषेक के समान माना जाता है. हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा की भी योजना बनाई गई है.
17 जनवरी को भव्य स्थापना समारोह को लेकर विराट रामायण मंदिर परिसर में तैयारियां अंतिम चरण में हैं. इस दिन दुनिया के सबसे विशाल शिवलिंग को ट्रक से उतारकर मंदिर परिसर में स्थापित करने के लिए भोपाल से एक स्पेशल और अत्याधुनिक क्रेन मंगाई गई है. यह क्रेन सामान्य नहीं, बल्कि हेवी-ड्यूटी श्रेणी की है. इसका कुल वजन करीब 750 टन बताया जा रहा है. इतनी क्षमता वाली क्रेन को खासतौर पर इसी शिवलिंग को सुरक्षित तरीके से उठाने और निर्धारित स्थान पर स्थापित करने के लिए बुलाया गया है.
आपको बता दें कि दुनिया का सबसे बड़ा यह शिवलिंग 21 नवंबर को तमिलनाडु के महाबलीपुरम से पूर्वी चंपारण के कैथवलिया स्थित विराट रामायण मंदिर के लिए रवाना किया गया था. तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से होते हुए करीब 2500 किलोमीटर की दूरी तय कर 45 दिनों में यह बिहार पहुंच चुका है. गोपालगंज से यह शिवलिंग खजुरिया और हुसैनी के रास्ते केसरिया पहुंचेगा.
33 फीट ऊंचा यह शिवलिंग तमिलनाडु के महाबलीपुरम के पट्टीकाडु गांव में एक ही ब्लैक ग्रेनाइट मोनोलिथ पत्थर से तैयार किया गया है. इसके निर्माण में करीब 10 साल का समय लगा. शिवलिंग का वजन लगभग 210 मीट्रिक टन है और इसे 96 चक्का वाले विशेष ट्रक से सड़क मार्ग के जरिए बिहार लाया गया.
विश्व का सबसे बड़ा मंदिर होगा
महावीर मंदिर न्यास समिति द्वारा निर्मित हो रहा विराट रामायण मंदिर आचार्य किशोर कुणाल का ड्रीम प्रोजेक्ट है. मंदिर का प्रवेश द्वार, गणेश स्थल, सिंह द्वार, नंदी, शिवलिंग स्थल और गर्भगृह की पाइलिंग का काम पूरा हो चुका है. 120 एकड़ में फैला यह मंदिर परिसर 1080 फीट लंबा और 540 फीट चौड़ा होगा. इसमें 18 शिखर और 22 मंदिर होंगे. मुख्य शिखर की ऊंचाई 270 फीट रखी गई है.
पटना से करीब 120 किलोमीटर दूर स्थित इस मंदिर में 17 जनवरी को होने वाले शिवलिंग स्थापना समारोह में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है. मंदिर निर्माण पूरा होने के बाद यह विश्व का सबसे बड़ा मंदिर होगा और बिहार को वैश्विक धार्मिक मानचित्र पर एक नई पहचान देगा.
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