परिजनों का आरोप है कि मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे 108 एंबुलेंस से भेजा जाना चाहिए था, जिसमें बेहतर ऑक्सीजन और मेडिकल सुविधा उपलब्ध होती है। इसके बजाय मरीज को जननी एक्सप्रेस एंबुलेंस से रवाना किया गया। एंबुलेंस में ऑक्सीजन के दो सिलेंडर मौजूद थे, लेकिन उनमें से एक सिलेंडर में पहले से ही ऑक्सीजन बेहद कम थी।
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जबलपुर जाते समय शाहपुरा-कुण्डम के पास एंबुलेंस में ऑक्सीजन पूरी तरह खत्म हो गई। ऑक्सीजन की कमी से मरीज की हालत और बिगड़ती चली गई। परिजनों का कहना है कि उन्होंने एंबुलेंस स्टाफ को स्थिति से अवगत कराया, लेकिन समय रहते कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई। आखिरकार दोपहर करीब 1 बजे रास्ते में ही रविंद्र कुमार मरावी ने दम तोड़ दिया।
मरीज की मौत की खबर मिलते ही परिजन और ग्रामीण आक्रोशित हो गए और जिला अस्पताल पहुंच गए। उन्होंने ड्यूटी डॉक्टर से बात करने की कोशिश की, लेकिन एक घंटे से अधिक इंतजार के बावजूद डॉक्टर सामने नहीं आए। अस्पताल स्टाफ ने भी संतोषजनक जानकारी देने से इनकार कर दिया, जिससे गुस्सा और भड़क गया।
आक्रोशित परिजनों ने जिला अस्पताल के सामने सड़क जाम कर दिया और प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ नारेबाजी की। मौके पर पहुंची पुलिस ने समझाइश देकर स्थिति को नियंत्रित किया। परिजनों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, दोषी डॉक्टर और स्टाफ पर कड़ी कार्रवाई तथा पीड़ित परिवार को न्याय और मुआवजा देने की मांग की है। घटना ने एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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