हरियाणा के पंचकूला में मेयर का पद सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित होते ही अब पार्टी सिंबल की जोर आजमाइश शुरू हो गई है। सामान्य वर्ग आबादी बहुल पंचकूला में कांग्रेस-BJP के नेता काफी दिन से मेयर चुनाव को लेकर भाग-दौड़ में जुटे थे, उन्होंने अब राहत की सांस ली है। पंचकूला में जातीय समीकरणों की बात की जाए तो पंजाबी और वैश्य बिरादरी के वोटरों की संख्या सबसे अधिक है। इसलिए दोनों पार्टियां अपनी प्रत्याशी का चयन भी इन्हीं दोनों समुदायों से आमतौर पर करती रहीं हैं। विधानसभा चुनाव की बात की जाए तो छह चुनाव से भाजपा वैश्य बिरादरी पर दांव खेलती रही है। वहीं निगम के पहले चुनाव में भी कुलभूषण गोयल के तौर पर BJP ने वैश्य समुदाय से अपना प्रत्याशी दिया था। वहीं ऐसे में कांग्रेस के पास दूसरे बड़े वोट बैंक पंजाबी समुदाय के प्रत्याशी को उतारना मजबूरी बन जाएगा। कांग्रेस-भाजपा टिकट के लिए ये कर रहे हैं प्रयास
पंचकूला मेयर चुनाव टिकट के लिए सबसे अधिक मारामारी BJP में चल रही है। पूर्व मेयर कुलभूषण गोयल, प्रदीप गोयल, प्रवक्ता रंजीता मेहता, श्यामल बंसल और अनिल थापर भी टिकट की रेस में हैं। वहीं कांग्रेस में अभी केवल पूर्व चेयरमैन रविंद्र रावल व महिला कांग्रेस की प्रदेश प्रधान सुधा भारद्वाज का नाम ही सामने आ रहा है। 2020 में हुआ था करीबी मुकाबला
पंचकूला मेयर चुनाव 2020 में कांग्रेस-BJP के बीच कांटे का मुकाबला हुआ था। जिसमें 2057 वोट से भाजपा के कुलभूषण गोयल मेयर पद का चुनाव जीत गए । उन्होंने कांग्रेस की उपिंदर आहलूवालिया को मात दी। पंचकूला में पार्षद पद के लिए हुए चुनाव में भाजपा को 9 सीटों पर जीत मिली। कांग्रेस ने सात सीटों पर जीत हासिल की है। 2 सीटें जजपा के खाते में आई और दो सीटों पर आजाद प्रत्याशी जीते। एससी वर्गीकरण का BJP को मिलेगा फायदा
पंचकूला नगर निगम के चुनाव में कांग्रेस करीबी मुकाबल में हारी थी। लेकिन उसके बाद प्रदेश सरकार ने एससी का वर्गीकरण कर दिया है। जिसका फायदा भाजपा को मिल सकता है। कांग्रेस की तरफ ओएससी तथा भाजपा की तरफ डीएससी की जातियों का झुकाव नजर आ रहा है।
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.