पलवल जिले के छांयसा गांव में हेपेटाइटिस के बढ़ते प्रकोप के बाद जिला स्वास्थ्य विभाग ने अवैध क्लीनिकों और झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। सिविल सर्जन के आदेश पर गठित टीमों ने रूपड़ाका और पिंगौड़ गांवों में छापेमारी कर दो फर्जी डॉक्टरों को रंगे हाथों पकड़ा है। ये दोनों आरोपी बिना किसी वैध डिग्री के मरीजों का इलाज कर रहे थे। रूपड़ाका गांव में चला रहा था फर्जी क्लीनिक हथीन उपमंडल के छांयसा गांव में हेपेटाइटिस के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने एक विशेष टीम गठित की थी। ड्यूटी मजिस्ट्रेट डॉ. संजय कुमार और डॉ. देवेंद्र की देखरेख में टीम ने उटावड़ के रूपड़ाका गांव में छापा मारा। यहां ऐजाज खान नामक व्यक्ति अपना क्लीनिक चलाता मिला। टीम को मौके से स्टेथोस्कोप, नेबुलाइजर, कैंची और 23 प्रकार की एलोपैथिक दवाइयां व इंजेक्शन मिले। जांच में पाया गया कि ऐजाज खान के पास कोई वैध मेडिकल डिग्री या डिप्लोमा नहीं था, फिर भी वह खुद को डॉक्टर बताकर मरीजों का इलाज कर रहा था। पिंगौड़ गांव में भी पकड़ा गया फर्जी डॉक्टर दूसरी कार्रवाई सदर थाना क्षेत्र के पिंगौड़ गांव में की गई। जिला सिविल सर्जन कार्यालय में मिली शिकायत के आधार पर डॉ. सफीक अहमद और ड्रग कंट्रोलर प्रवीण राठौर की टीम ने ओम क्लीनिक पर छापा मारा। क्लीनिक संचालक रूपचंद ने टीम के सामने स्वीकार किया कि वह केवल 12वीं पास है और पिछले पांच साल से एलोपैथिक इलाज कर रहा था। पुलिस ने मौके से 25 प्रकार की दवाइयां, बीपी मशीन, पल्स ऑक्सीमीटर और 791 पन्नों का ओपीडी रजिस्टर जब्त किया है। दोनों आरोपी पुलिस के हवाले दोनों फर्जी डॉक्टरों को पुलिस के हवाले कर दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिले में अवैध क्लीनिकों और झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा, ताकि लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जा सके।
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.