Palamu Water Contamination Crisis: पलामू के चुकरू गांव के भूमिगत जल में फ्लोराइड की मात्रा काफी अधिक पाई गई है जिसे पीने से लोगों को हड्डियां टेढ़ी हो जाना और शरीर अकड़ जाने की समस्याएं भी सामने आ रही हैं. करोड़ों के खर्च के बाद भी कोई काम नहीं हुआ है.
जांच रिपोर्ट बताती है कि चुकरू गांव के भूमिगत जल में फ्लोराइड की मात्रा 10 से 12 मिलीग्राम प्रति लीटर तक है, जबकि सुरक्षित सीमा महज 1.5 मिलीग्राम है. यही जहरीला फ्लोराइड दशकों से गांव वालों की हड्डियों में उतर रहा है. नतीजा यह है कि गांव की करीब 70 प्रतिशत आबादी किसी न किसी रूप में फ्लोरोसिस की शिकार है. अब तक दो सौ से अधिक लोग असमय मौत के मुंह में समा चुके हैं और करीब सौ लोग स्थायी रूप से विकलांग हैं.
हड्डियां टेढ़ी और शरीर अकड़ जानें की शिकायत
फ्लोराइड युक्त पानी का असर इतना भयावह है कि बच्चे कम उम्र में ही बूढ़े नजर आने लगते हैं. कई लोग देखने में किशोर लगते हैं, लेकिन उनकी उम्र 20 से 25 साल के पार होती है. हड्डियां टेढ़ी हो जाती हैं, शरीर अकड़ जाता है और चलना तक मुश्किल हो जाता है. यही वजह है कि चुकरू गांव का नाम सुनते ही लोग यहां रिश्ता करने से कतराते हैं.
चुकरू गांव की अनीता कुंअर महज 40 साल की हैं, लेकिन पिछले पांच साल से बिस्तर पर हैं. शरीर इतना कमजोर हो चुका है कि उठना-बैठना नामुमकिन है. लोग सहारा देकर उठाते है. कोई सूद लेने नहीं आता है. वो पिछले पांच वर्षों से बिस्तर पर पड़ गई है.वहीं 45 वर्षीय सोहर सिंह दो डंडों के सहारे चलते हैं. बीते 20 वर्षों से पूरे शरीर में असहनीय दर्द झेल रहे हैं. वे कहते हैं- ‘पूरा गांव पानी पीकर अपंग हो गया है.’
करोड़ों खर्च लेकिन कोई समाधान नहीं
फ्लोराइड मुक्त पानी देने के नाम पर कई योजनाएं आईं, करोड़ों रुपये खर्च हुए, लेकिन नतीजा शून्य रहा. जिप सदस्य अर्जुन सिंह बताते हैं कि आज भी लोग मजबूरी में वही जहरीला पानी पी रहे हैं. यहां के लोग आज भी पानी पीने से दिव्यांग हो जाते हैं. कई योजना के तहत पानी पहुंचाने का प्रयास किया गया लेकिन आज भी नतीजा कुछ नहीं निकला.
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