Palamu News:झारखंड के ऐतिहासिक और पर्यटन मानचित्र पर पलामू किला एक ऐसी धरोहर है, जो अपने गौरवशाली अतीत, रहस्यमयी संरचना और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण विशेष पहचान रखता है. पलामू जिले में स्थित यह किला 680 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है
तीसरा रास्ता आज भी रहस्य
हेरिटेज कंजर्वेशन से जुड़े श्रीदेव सिंह के अनुसार पलामू किला झारखंड का एकमात्र ऐसा किला है, जिसकी संरचना और ऐतिहासिक महत्व इसे अन्य किलों से अलग बनाता है. खास बात यह है कि इस किले में प्रवेश के तीन रास्ते थे. पहला रास्ता पूर्व दिशा में औरंगा नदी के तट से होकर जाता था. दूसरा द्वार उत्तर दिशा में है, जिससे आज भी लोग किले के भीतर प्रवेश करते हैं. वहीं तीसरा द्वार सबसे रहस्यमयी है, जिसके बारे में कहा जाता है कि यह गुप्त मार्ग शाहपुर किला और रोहतास किला तक जाता था. यह गुप्त द्वार आज भी लोगों के लिए कौतूहल और आकर्षण का विषय बना हुआ है.
औरंगा के तट पर एक स्थित है किला
पलामू जिला मुख्यालय मेदिनीनगर से लगभग 25 किलोमीटर दूर रबदा गांव के फुलवरिया टोला में औरंगा नदी के तट पर स्थित यह स्थल हर साल सैकड़ों सैलानियों को अपनी ओर खींचता है. नदी के किनारे प्राकृतिक सौंदर्य के बीच लोग पिकनिक और सैर का आनंद लेते हैं. यहां सैकड़ों वर्ष पुराना शिव मंदिर और राजा मेदिनी राय की प्रतिमा भी स्थापित है. नदी के उस पार पहाड़ी पर स्थित पलामू किला दूर से ही लोगों को आकर्षित करता है. इसी किले से राजा मेदिनी राय ने शासन किया था.
पलामू में दो दुर्ग
एक मैदानी इलाके में स्थित पुराना किला, जिसे चेरो राजवंश ने बनवाया था, और दूसरा पहाड़ी पर स्थित नया किला, जिसका निर्माण राजा मेदिनी राय ने कराया था। भले ही दोनों किले आज जर्जर अवस्था में हों, लेकिन आज भी यह क्षेत्र की शान और पर्यटन का प्रमुख केंद्र बने हुए हैं. स्थानीय निवासी अवधेश सिंह चेरो बताते हैं कि जनवरी से मार्च तक यहां पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ती है. बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश से लोग यहां इतिहास, प्रकृति और रोमांच का संगम देखने आते हैं.
ऐसे पहुंचे यहां
पलामू किला पहुंचने के लिए मेदिनीनगर से सतबरवा होकर फुलवरिया गांव या बेतला नेशनल पार्क से तीन किलोमीटर पूर्व की ओर जाया जा सकता है. ऑटो, कैब या निजी वाहन से यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है. इतिहास, रहस्य और प्रकृति से जुड़ना हो, तो पलामू किले का यह गुप्त द्वार देखना न भूले.
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