कांकेर केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ पखांजूर क्षेत्र में विभागीय लापरवाही और गैस एजेंसी की मनमानी की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। क्षेत्र के सैकड़ों पात्र हितग्राही पिछले एक साल से गैस कनेक्शन पाने के लिए आमाबूदीन गैस एजेंसी (अंतागढ़) के चक्कर काटने को मजबूर हैं, लेकिन उन्हें समाधान के बजाय सिर्फ कोरा आश्वासन मिल रहा है।
फाइलों में दबा कनेक्शन, चूल्हे में जल रही लकड़ी
ग्रामीण महिलाओं ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि एक वर्ष पूर्व उन्होंने योजना के तहत आवेदन किया था। आवेदन स्वीकृत होने के बावजूद आज तक उन्हें न तो गैस सिलेंडर मिला है, न रेगुलेटर और न ही चूल्हा। आलम यह है कि ‘धुआं मुक्त रसोई’ का सपना देखने वाली ये महिलाएं आज भी चूल्हे और लकड़ियों के बीच गुजर-बसर कर रही हैं, जिससे उनके और उनके बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है।
अधिकारियों की टालमटोल: एक एजेंसी से दूसरी एजेंसी का चक्कर
हितग्राहियों का आरोप है कि जब वे इस संबंध में सेल्स ऑफिसर मनोज मंडल से शिकायत करते हैं, तो वे अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए उन्हें बिसंभर गैस एजेंसी में ट्रांसफर कर देते हैं। लेकिन जब हितग्राही वहां पहुंचते हैं, तो बिसंभर एजेंसी उन्हें कनेक्शन देने से साफ इनकार कर देती है।
“हमें यहाँ से वहाँ भटकाया जा रहा है। ऐसा लगता है कि विभागीय अधिकारियों और एजेंसी संचालकों के बीच कोई साठगांठ है, जिसके कारण आमाबूदीन एचपी गैस एजेंसी पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जा रही है।एजेंसी की कार्यप्रणाली से त्रस्त ग्रामीणों और स्थानीय निवासियों ने अब प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने मांग की है कि:मामले की तत्काल निष्पक्ष जांच की जाए।एजेंसी और अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई हो। सभी पात्र हितग्राहियों को जल्द से जल्द कनेक्शन प्रदान किया जाए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन ने जल्द ही उनकी सुध नहीं ली, तो वे उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे। अब देखना यह है कि प्रशासन कागजों में सिमट चुकी इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए क्या कदम उठाता है।
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.