Bilaspur News: किसान जदूनंदन वर्मा ने लोकल 18 से कहा कि अगर आप जैविक तरीके से मटर की खेती करना चाहते हैं, तो खेत में गोबर की खाद और मुर्गी खाद का इस्तेमाल जरूर करें. इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और पौधों को जरूरी प्राकृतिक पोषण मिलता है.
उन्होंने आगे बताया कि उन्होंने मटर की बुवाई अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में ही कर दी थी. किसानों के लिए उन्होंने एक देसी पहचान भी बताई. उन्होंने कहा, ‘जब नारियल का तेल जमने लगे, तब समझ जाइए कि मटर की बुवाई का सही समय आ गया है.’ समय पर बुवाई करने से पौधों की बढ़वार अच्छी होती है और मटर ज्यादा होती है.
अच्छे मुनाफे की पूरी उम्मीद
जदूनंदन वर्मा का कहना है कि जिस तरह से उनकी मटर की फसल खिल रही है, उससे उन्हें आने वाले दिनों में अच्छे मुनाफे की पूरी उम्मीद है. जैविक खेती में लागत कम होती है और बाजार में जैविक उत्पादों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है.
मेथी की बुवाई से मिट्टी में नाइट्रोजन संतुलन
उन्होंने आगे कहा कि मटर की खेती के साथ-साथ उन्होंने मेथी की भी बुवाई की है, जिससे मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा प्राकृतिक रूप से पूरी होती है. यह तरीका मिट्टी की सेहत बनाए रखने के साथ-साथ अगली फसलों के लिए भी फायदेमंद साबित होता है.
जैविक खेती से सेहत और पर्यावरण दोनों सुरक्षित
किसान वर्मा का मानना है कि जैविक खेती ही सबसे बेहतर विकल्प है. इससे पैदावार अच्छी होती है, फसल रसायनों से पूरी तरह मुक्त रहती है और उपभोक्ताओं के लिए ज्यादा पौष्टिक साबित होती है. साथ ही यह पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाती है.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
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