मोबाइल और ऑनलाइन गेम्स की लत अब सिर्फ समय की बर्बादी नहीं बल्कि परिवारों के लिए गंभीर मानसिक और सामाजिक संकट बनती जा रही है।
पंचकूला सेक्टर-6 के सिविल अस्पताल के मनोरोग विभाग में सामने आ रहे मामलों ने हालात की गंभीरता उजागर कर दी है। डॉक्टरों के मुताबिक रोजाना औसतन तीन से चार मरीज गेमिंग एडिक्शन की समस्या लेकर इलाज के लिए पहुंच रहे हैं जबकि हर महीने आत्महत्या के प्रयास से जुड़े कई मामले भी इसी लत से जुड़े पाए जा रहे हैं।
मनोरोग चिकित्सक डॉ. एमपी शर्मा ने कहा कि ऑनलाइन गेम्स की लत से जूझ रहे बच्चों को डांटें नहीं, उनकी बात धैर्य से सुनें। जिस गेम से बच्चा जुड़ा है, उसके सकारात्मक और सुरक्षित विकल्प तलाशें ताकि उसका ध्यान धीरे-धीरे भटके और वह मानसिक रूप से सुरक्षित रह सके।
वहीं, मोहाली सिविल अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. गुरमुख सिंह ने कहा कि बच्चों में मोबाइल और गेम्स पर बढ़ती निर्भरता चिंता का विषय है। अभिभावकों को बच्चों के व्यवहार में होने वाले छोटे बदलावों पर नजर रखनी चाहिए। समय पर संवाद, वैकल्पिक गतिविधियां और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लेकर इस लत को गंभीर बनने से रोका जा सकता है।
केस 1- ऑस्ट्रेलिया छोड़ भारत लौट आया परिवार
13 वर्षीय एक बच्चे को रोब्लॉक्स गेम की लत लग गई। पूरी रात जागकर गेम खेलने लगा। मना करने पर आत्महत्या की धमकी देने लगा। बच्चे की हालत से घबराकर परिवार ने ऑस्ट्रेलिया छोड़ पंचकूला लौटने का फैसला किया ताकि उसे नियंत्रित माहौल मिल सके। बावजूद इसके हालात नहीं सुधरे। बच्चा स्कूल जाना बंद कर चुका था और वीकेंड पर पूरी रात गेम खेलता रहा। अंततः उसे सिविल अस्पताल के मनोरोग विभाग में इलाज के लिए लाया गया, जहां अब काउंसलिंग और उपचार चल रहा है।
केस 2-इंजीनियरिंग की पढ़ाई छूट गई
19 वर्षीय युवक चंडीगढ़ के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ रहा था। कॉलेज जाने के बहाने वह पार्कों में बैठकर ऑनलाइन गेम खेलता रहा। सेमेस्टर के खराब नतीजों के बाद सच्चाई सामने आई। परिवार के विरोध पर युवक ने आत्महत्या का प्रयास किया। फिलहाल उसका इलाज चल रहा है।
केस-3- कारोबार बंद, परिवार से रिश्ते खराब
23 वर्षीय युवक ने परिवार के सहारे के लिए करियाना दुकान खोली थी लेकिन ऑनलाइन गेम्स की लत के कारण दुकान पर ध्यान देना छोड़ दिया। घाटा बढ़ा और दुकान बंद करनी पड़ी। गुस्सा और झगड़े बढ़ने लगे। पड़ोसियों की सलाह पर उसे इलाज के लिए सिविल अस्पताल लाया गया जहां पिछले छह माह से इलाज चल रहा है।
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