Last Updated:
Onion Farming Tips: देवघर के कृषि विशेषज्ञों के अनुसार प्याज की गांठ बड़ी करने के लिए भुरभुरी मिट्टी, सड़ी गोबर की खाद और सल्फर का संतुलित प्रयोग अनिवार्य है. रोपाई के बाद राख का छिड़काव और नियमित हल्की सिंचाई कंद को मजबूत और कीटमुक्त बनाती है. जिससे किसानों को बंपर मुनाफा मिलता है.
देवघर: प्याज की खेती किसानों के लिए मुनाफे का अच्छा जरिया बन सकती है, लेकिन कई बार मेहनत के बावजूद उम्मीद के मुताबिक पैदावार नहीं मिलती. इसकी एक बड़ी वजह होती है प्याज के कंद यानी गांठ का छोटा रह जाना. कंद जितना बड़ा और मजबूत होगा, बाजार में उतना ही बेहतर दाम मिलेगा. इसलिए जरूरी है कि फसल की शुरुआत से ही सही देखभाल की जाए.
क्या कहते है देवघर के कृषि विशेषज्ञ?
देवघर के कृषि विशेषज्ञ वकील यादव बताते हैं कि प्याज की अच्छी पैदावार के लिए सबसे पहले मिट्टी का सही चुनाव बेहद जरूरी है. मिट्टी हल्की, भुरभुरी और पानी निकास वाली होनी चाहिए.भारी और सख्त मिट्टी में कंद का विकास ठीक से नहीं हो पाता.खेत की तैयारी के समय पर्याप्त मात्रा में सड़ी हुई गोबर की खाद मिलानी चाहिए. इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं.
संतुलित मात्रा में करें रासायनिक खाद का प्रयोग
रासायनिक खाद का उपयोग भी संतुलित मात्रा में करना चाहिए. खासकर सल्फर का प्रयोग प्याज की फसल के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है. सल्फर जड़ों को मजबूत बनाता है और प्याज की तीखापन यानी झांस को भी बढ़ाता है. इसके अलावा यह कंद के आकार को बेहतर बनाने में मदद करता है. लेकिन ध्यान रहे, जरूरत से ज्यादा खाद नुकसान भी कर सकती है, इसलिए संतुलन जरूरी है.
घरेलू नुस्खे से होगी बंपर पैदावार
घरेलू उपायों की बात करें तो खेत में राख का उपयोग काफी लाभदायक माना जाता है. रोपाई के लगभग एक हफ्ते बाद पहली गुड़ाई-निराई जिसे देहाती भाषा मे कोड़ान कहते है वो कर लें. उसके बाद पूरे खेत में हल्की परत के रूप में राख का छिड़काव करें. राख मिट्टी को भुरभुरा बनाती है और कई हानिकारक कीटों को भी दूर रखने में मदद करती है. यही वजह है कि किसान राख को प्राकृतिक दवा की तरह इस्तेमाल करते हैं. इससे कंद का विकास अच्छा होता है और फसल स्वस्थ रहती है.
सिंचाई की अहम भूमिका
सिंचाई भी प्याज की खेती का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. हालांकि प्याज की फसल ज्यादा पानी नहीं मांगती, लेकिन नियमित और संतुलित सिंचाई जरूरी है. अगर खेत में बहुत कम पानी दिया जाएगा तो मिट्टी सख्त हो जाएगी और कंद का आकार छोटा रह सकता है. वहीं जरूरत से ज्यादा पानी देने पर जड़ सड़ने का खतरा रहता है. इसलिए समय-समय पर हल्की सिंचाई करते रहना चाहिए.
अंत में यही कहा जा सकता है कि प्याज की अच्छी पैदावार के लिए मिट्टी की सही तैयारी, जैविक और रासायनिक खाद का संतुलित उपयोग, राख जैसे घरेलू उपाय और नियमित सिंचाई बेहद जरूरी हैं. अगर किसान इन बातों का ध्यान रखें, तो प्याज की गांठ मजबूत, बड़ी और ज्यादा मुनाफा देने वाली बन सकती है.
About the Author
मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.