दिल्ली की सड़कों पर अब ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों की चालाकी काम नहीं आएगी। अब तक वाहन चालक स्पीड कैमरा देखकर रफ्तार कम कर लेते थे, कैमरा न दिखे तो तेज गाड़ी चलाते थे। पुलिस न हो तो रेड लाइट जंप करना, गलत जगह पार्किंग आम बात थी। अब दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने इन तरीकों पर लगाम लगाने की तैयारी कर ली है। ट्रैफिक पुलिस राजधानी की सड़कों पर हैंडी कैमरे यानी हैंडी स्पीड डिटेक्शन एंड ट्रैफिक वॉयलेशन कैमरे तैनात करने जा रही है। इन पोर्टेबल कैमरों की खासियत यह है कि इन्हें कहीं भी, कभी भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इन कैमरों के इस्तेमाल को लेकर पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण देने की प्रक्रिया सोमवार से शुरू की गई है। इससे नियम तोड़ने वालों की पहचान आसान होगी और चालान की कार्रवाई और सख्त हो सकेगी।
पुलिसकर्मियों को दी जा रही ट्रेनिंग
इन कैमरों को लेकर चालान करने वाले ट्रैफिक पुलिस के हवलदार व जेडो को ट्रेनिंग देना सोमवार से शुरू किया है। पांच दिवसीय ये ट्रेनिंग सेशन मेट्रो होटल में दी जा रही है। ट्रेनिंग के पहले दिन सोमवार को दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के ज्यादातर जेडो व हवलदार को बुलाया था।
ट्रेनिंग में ये बताया जा रहा है
पहले दिन हार्डवेयर को लेकर पुलिसकर्मियों को ट्रेनिंग दी गई।
ट्रेनिंग के दूसरे दिन एसओपी जारी की जाएगी और उसके बारे में बताया गया जाएगा।
इसके बाद पुलिसकर्मियों को कैमरे को चलाना सिखाया जाएगा।
ट्रेनिंग के पांचवें दिन यानि आखिरी दिन पुलिसकर्मियों को सड़कों पर उतारकर कैमरों से चालान करना सिखाया जाएगा कि गलत पार्किंग व ओवर स्पीड का चालान कैसे होता है।
यातायात नियम तोड़ने वालों को पकड़ने के लिए लगे ये कैमरे
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों को पकड़ने के लिए हाई-टेक कैमरों का एक बड़ा नेटवर्क लगा रखा है, जिसमें मुख्य रूप से एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित कैमरे, एएनपीआर (ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) कैमरे, आरएलवीडी (रेड लाइट उल्लंघन डिटेक्शन) कैमरे, और ओएसवीड (ओवर स्पीड उल्लंघन डिटेक्शन) कैमरे लगा रखे हैं।
एक प्राइवेट कंपनी ने दिल्ली ट्रैफिक पुलिस को पांच हैंडी कैमरे दिए हैं। इन कैमरों के जरिये पुलिसकर्मी सड़क पर खड़े होकर या वाहन में जाते समय रिकॉर्डिंग करते रहेंगे। कैमरे एक साथ कई चालान जैसे रॉन्ग पार्किंग, ओवर स्पीड, ट्रिपल राइडिंग, बिना सीट बेल्ट और रेड लाइट जंपिंग आदि के चालान कर सकेंगे। कई बार वाहन चालक मोबाइल में ऐसा साफ्टवेयर अपलोड कर लेते हैं जो स्पीड कैमरों की लोकेशन बता देते हैं। ऐसे में चालक वाहन की स्पीड कम कर लेता है। अब हैंडी कैमरों से बचना आसान नहीं होगा। – एसके सिंह, उपायुक्त दिल्ली ट्रैफिक पुलिस
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