चंडीगढ़। होली से पहले आने वाले होलाष्टक के चलते शहर में आठ दिनों तक कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किए जाएंगे। इस वर्ष होलाष्टक 24 फरवरी से शुरू होकर 3 मार्च तक रहेगा। सेक्टर-28 के खेड़ा शिव मंदिर के पुजारी आचार्य ईश्वर चंद्र शास्त्री के अनुसार फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से पूर्णिमा तक के आठ दिन होलाष्टक कहलाते हैं। चूंकि ये दिन होली से ठीक आठ दिन पहले आरंभ होते हैं इसलिए कई स्थानों पर इन्हें होलियां भी कहा जाता है।
शास्त्रों में होलाष्टक के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, यज्ञोपवीत संस्कार, गृह प्रवेश जैसे सभी शुभ कार्य वर्जित माने गए हैं। मान्यता है कि इन दिनों ग्रहों का प्रभाव उग्र रहता है और नकारात्मक शक्तियां बढ़ जाती हैं। आचार्य के अनुसार होलाष्टक में पूजा-पाठ, मंत्र जाप, दान-पुण्य, सत्संग और भगवान विष्णु के नरसिंह रूप का ध्यान करना श्रेष्ठ माना गया है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इसी अवधि में भक्त प्रह्लाद को दैत्यराज हिरण्यकशिपु ने कई यातनाएं दी थीं, इसलिए इन दिनों शुभ कार्यों से परहेज किया जाता है।
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