ग्रीन टी, मसाला टी आदि के बाद अब कंडाली यानी नेटल टी भी मार्केट में आ गई है। लोगों को जहां यह चाय खूब पसंद आ रही है वहीं इससे ग्रामीणों की आमदनी भी हो रही है। नेटल की सूखी पत्तियां 100 से 150 रुपये तक में बिक रही हैं।
हिमालीय क्षेत्रों में होने वाली जंगली घास नेटल यानि कंडाली बारह महीने होती है। अब यह रोजगार का साधन भी बन रही है। कालेश्वर में संचालित हार्क अलकनंदा कृषि व्यवसाय स्वायत्त सहकारिता महिला समूह के माध्यम से कंडाली की चाय बनाने का काम शुरू किया है।
एक किलो पत्तियों में इसके करीब 40 ग्राम के 25 से अधिक पैकेट तैयार हो रहे हैं। इससे जहां महिला स्वयं सहायता समूह की आय हो रही है वहीं गांवों से कंडाली की पत्तियां लाने वाले ग्रामीणों की भी आय हो रही है। एक साल में हार्क ग्रामीणों को करीब डेढ़ लाख तक का भुगतान कर चुका है।