बिहार में नेशनल परमिट प्राप्त बस, कार, ट्रैवल्स, विंगर समेत विभिन्न 47000 कॉमर्शियल सवारी वाहनों ने महिला सुरक्षा के लिए पैनिक बटन और व्हीकल ट्रैकिंग डिवाइस नहीं लगाया है। कुल 48 हजार में से सिर्फ 1000 गाड़ियों में ही यह लगा है। केंद्र सरकार ने हर पै
फिर भी इसपर वाहन मालिकों ने ध्यान नहीं दिया। अब सरकार इस दिशा में कार्रवाई करेगी। इन गाड़ियों की जांच की जाएगी। जिन वाहनों में पैनिक बटन और ट्रैकिंग डिवाइस नहीं होगी, उनको जब्त किया जाएगा। खास बातचीत के दौरान राज्य के परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने बताया कि 15 दिनों में नेशनल परमिट वाले वाहनों में वीएलटीडी नहीं लगाई गई तो कार्रवाई की जाएगी। डिवाइस लगाने में कहां चूक हो रही है, इसकी जानकारी कर अधिकारी, वाहन और एजेंसियों पर कार्रवाई की जाएगी।
पटना में 3100 स्कूली वाहनों का डीटीओ के पास रिकॉर्ड नहीं
व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस स्कूली वाहनों के लिए अनिवार्य किया गया था। लेकिन, पटना जिले की 1066 स्कूली बसें और 2057 वैन डीटीओ के रडार से बाहर हैं। क्योंकि इन वाहनों के रजिस्ट्रेशन का पटना डीटीओ के पास रिकॉर्ड नहीं है। अब इनमें व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस लगाना मुश्किल है। ऐसे वाहन बिना पैनिक बटन के सड़कों पर दौड़ रहे हैं।
वीएलटीडी नहीं लगने के कारण
- वीएलटीडी लगाने वाली एजेंसी की लोगों को जानकारी नहीं है।
- डीटीओ कार्यालय में जाने के बाद ही पता चलता है।
- एजेंसी की जानकारी देने के लिए कोई ऐप या पोर्टल नहीं है।
- नियम पहले से है, लेकिन लागू कराने के लिए सख्ती नहीं बरती गई।
- वीएलटीडी को केंद्र ने पहले सवारी गाड़ियों में अनिवार्य किया था। लेकिन बिहार में इसे 2023 से लागू किया गया।
- बस/टैक्सी/ऑटो मालिकों को इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं थी।
पैनिक बटन की जरूरत क्यों पड़ी
- महिला एवं बाल सुरक्षा : बसों में लगा इमरजेंसी (पैनिक) बटन दबाते ही कंट्रोल रूम को अलर्ट चला जाता है, जिससे पुलिस और एंबुलेंस तुरंत मदद पहुंचा सकती है, खासकर छेड़छाड़ या खतरे की स्थिति में।
- रियल टाइम ट्रैकिंग : परिवहन विभाग और वाहन मालिक बस की सटीक लोकेशन, स्पीड और रूट को लगातार मॉनिटर कर सकते हैं, जिससे अनुशासन बढ़ता है और दुर्घटनाएं रुकती हैं।
- अपराध नियंत्रण : यह रेत खनन जैसे रात के समय होने वाले अवैध कामों और अन्य आपराधिक गतिविधियों को रोकने में मदद करता है, क्योंकि हर वाहन का लोकेशन पता होती है।
- परिवहन पारदर्शिता : इससे परिवहन व्यवस्था में पारदर्शिता आती है और यात्रियों को बसों की जानकारी आसानी से मिलती है। साथ ही परमिट नवीनीकरण और फिटनेस के लिए यह जरूरी हो गया है।
वीएलटीडी लगाने वाली 30 एजेंसियों पर होगी कार्रवाई
श्रवण कुमार ने कहा कि स्कूली बस-वैन, सार्वजनिक वाहनों में वीएलटीडी लगाना अनिवार्य है। सभी जिलों में डीटीओ को जांच करने के लिए कहा गया है। डिवाइस लगाने के लिए राज्य में 30 एजेंसी है। अगर एजेंसी की ओर से कमी होगी तो उस पर कार्रवाई की जाएगी, जुर्माना लगाया जाएगा। ट्रैकिंग डिवाइस लगने पर राज्य से किसी भी शहर में वाहन जाएगा तो परिवहन मुख्यालय से मॉनिटरिंग आसान होगी।
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