प्रधान जिला जज और सचिव ने संयुक्त रूप से प्रेस के माध्यम से जिले के लोगों से अपील की कि वे अपने लंबित सुलहनीय वादों के निपटारे के लिए राष्ट्रीय लोक अदालत में अवश्य आएं और इस पहल का लाभ उठाएं।
औरंगाबाद में शनिवार यानी 13 दिसंबर को साल के अंतिम और चौथे राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाना है। इसे लेकर जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सभागार में गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह जिला विधिक सेवा प्
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत सुलहनीय वादों के त्वरित निस्तारण का प्रभावी माध्यम है और इसके व्यापक प्रचार-प्रसार में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। जिला जज ने बताया कि लोक अदालत में अधिक से अधिक वादों को निपटाने के उद्देश्य से न्यायालयों में लंबित सभी प्रकार के सुलह योग्य मामलों से जुड़े पक्षकारों को पुलिस की सहायता से नोटिस भेजकर व्यक्तिगत रूप से सूचित किया गया है। इसके अतिरिक्त, नोटिसों में उपलब्ध मोबाइल नंबरों के माध्यम से भी कार्यालय द्वारा संबंधित पक्षकारों को लोक अदालत में उपस्थित होने की सूचना दी गई है।
‘मीडिया के जन जागरूकता अभियान से सकारात्मक परिणाम मिले’
प्रधान जिला जज ने मीडिया के सहयोग के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि पूर्ववर्ती राष्ट्रीय लोक अदालतों में जिस तरह मीडिया ने जन-जागरूकता बढ़ाने में योगदान दिया, उसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं। उन्होंने बताया कि इस बार भी जिला प्रशासन और विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से विभिन्न विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने अधीन लंबित सुलहनीय वादों की सूची उपलब्ध कराएं, ताकि सभी वादों को लोक अदालत में शामिल किया जा सके।
परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश अरुण कुमार भी इस अवसर पर उपस्थित रहे। उन्होंने बताया कि औरंगाबाद जिला पारिवारिक विवादों के निस्तारण में पहले भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर चुका है और इस बार भी अधिकतम परिवारिक वादों को सुलह-सहमति से निपटाने के प्रयास किए जाएंगे।
अब तक न्यायालय में लंबित 2329 सुलहनीय वाद चिह्नित किए
प्राधिकार की सचिव तान्या पटेल ने प्रेस को बताया कि अब तक न्यायालय में लंबित 2329 सुलहनीय वाद चिह्नित किए जा चुके हैं, जबकि 54 वादों में पक्षकारों ने निस्तारण के लिए सहमति प्रदान की है। इस लोक अदालत में कुल 600 वादों के निस्तारण का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, प्री-लिटिगेशन स्तर पर 5200 से अधिक बैंक ऋण से संबंधित मामलों में नोटिस भेजे गए हैं, जिनमें से 1500 से अधिक मामलों का निस्तारण लोक अदालत के जरिए करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
उन्होंने बताया कि न्यायालय स्तर पर बड़े पैमाने पर नोटिस भेजकर यह सुनिश्चित किया गया है कि अधिक से अधिक लोग लोक अदालत का लाभ उठा सकें। सचिव ने कहा कि जिला वासियों से यह अपील है कि वे 13 दिसंबर को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में शामिल होकर अपने लंबित वादों के त्वरित निस्तारण का लाभ उठाएं।
13 बेंच का किया गया है गठन
सचिव ने बताया कि व्यवहार न्यायालय औरंगाबाद तथा अनुमंडलीय न्यायालय दाउदनगर को मिलाकर कुल 13 बेंचों का गठन किया गया है। इनमें विभिन्न वादों जैसे भरण-पोषण, पारिवारिक विवाद, मोटर दुर्घटना, इजराय वाद, खनिज, श्रम, वन, बिजली, बैंक ऋण, एनआई एक्ट, दूरभाष विवाद, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 107/144 से संबंधित वाद तथा सुलहनीय आपराधिक मामलों का त्वरित निस्तारण किया जाएगा।
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