जिले का झोतेश्वर स्थित आश्रम इन दिनों राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। आशुतोष महाराज द्वारा स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराए जाने के बाद काशी स्थित मठ में पांच मंजिला इमारत, स्विमिंग पूल और शीश महल जैसी सुविधाओं के आरोप लगाए गए। साथ ही नरसिंहपुर के आश्रम को लेकर भी गंभीर दावे किए गए हैं।
बता दें कि झोतेश्वर में स्थित परमहंसी गंगा आश्रम की स्थापना ब्रह्मलीन स्वरूपानंद सरस्वती ने की थी। यह आश्रम लंबे समय से गुरु-शिष्य परंपरा और धार्मिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है।
क्या वाकई आलीशान है त्रिपुरालय आश्रम?
आश्रम को लेकर किए गए दावों को लेकर जमीनी हकीकत कुछ अलग तस्वीर पेश करती है। परिसर में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का त्रिपुरालय आश्रम एक साधारण दो मंजिला भवन के रूप में दिखाई देता है। ऊपरी मंजिल पर विश्राम कक्ष और निचली मंजिल पर श्रद्धालुओं से मुलाकात के लिए सादा कक्ष बना है। मौके पर स्विमिंग पूल या कथित शीश महल जैसे निर्माण के प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिले।
ये भी पढ़ें: Narsinghpur: आचार्यों के सम्मान पर आंच बर्दाश्त नहीं, नरसिंहपुर में बोले शंकराचार्य सदानंद सरस्वती
समर्थकों ने आरोप नकारे
आश्रम से जुड़े अचलानंद महाराज ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि यहां सादगीपूर्ण जीवनशैली अपनाई जाती है। उनका कहना है कि गौसेवा और गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाने की मांग के बाद से विवाद खड़ा किया गया है। आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है।
वहीं कांग्रेस नेत्री कल्याणी पांडे ने आश्रम द्वारा संचालित सामाजिक गतिविधियों और गौशाला के कार्यों का उल्लेख करते हुए आरोपों को दुर्भावनापूर्ण बताया। मामला फिलहाल कानूनी प्रक्रिया में है, लेकिन झोतेश्वर का यह आध्यात्मिक केंद्र अब प्रदेश की सियासत और सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बन गया है।
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.