हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिला निवासी तथा आतंकवाद विरोधी राष्ट्रीय राइफल में तैनात सैनिक की उत्तरी कश्मीर के जिला बारामुला की एक दुर्गम पहाड़ी में गिरने से मौत हो गई। वे अपनी ड्यूटी के दौरान पहाड़ी क्षेत्र में गश्त पर निकले थे। उनका पार्थिव शरीर आज उनके पै
भारतीय सेना की विशेष आतंकवाद विरोधी इकाई राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात नारनौल के गांव अकबरपुर निवासी सूबेदार हीरालाल बीती नौ जनवरी को शहीद हो गए। वह अपने साथियों के साथ संवेदनशील इलाके में नियमित पेट्रोलिंग पर थे। इसी दौरान फिसलन भरे रास्ते पर संतुलन बिगड़ने से वह गहरी खाई में गिर गए। जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई। आज शनिवार को उनका पार्थिव देह पैतृक गांव अकबरपुर पहुंचेगा, जहां पूरे सैन्य सम्मान और भावभीनी विदाई के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।
शहीद के सम्मान में ग्रामीणों द्वारा बनवाया गया पोस्टर
25 साल की देश की सेवा
महेंद्रगढ जिले के नांगल चौधरी थाना क्षेत्र के गांव अकबरपुर निवासी हीरालाल का जन्म 27 अप्रैल 1981 को हुआ था। उन्होंने 30 जनवरी 2000 को भारतीय सेना में भर्ती होकर देश सेवा को अपने जीवन का लक्ष्य बनाया। करीब 23 वर्षों की सेवा के दौरान उन्होंने जम्मू कश्मीर सहित कई कठिन क्षेत्रों में ड्यूटी निभाई और 23 मई 2023 को सूबेदार के पद पर पदोन्नत हुए। अनुशासन, साहस और कर्तव्यनिष्ठा उनकी पहचान थी।
तिरंगा यात्रा निकालेंगे
सूबेदार हीरालाल के पार्थिव देह के गांव पहुंचने से पहले ही अकबरपुर में शोक की लहर है। ग्रामीणों ने तय किया है कि वीर सपूत को अंतिम विदाई तिरंगा यात्रा के साथ दी जाएगी। गांव की गलियों से होकर जब तिरंगे में लिपटा उनका शरीर गुजरेगा तो हर घर से श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। स्थानीय लोग, पूर्व सैनिक और जनप्रतिनिधि भी अंतिम दर्शन के लिए पहुंचने की तैयारी कर रहे हैं।
एक बेटा व एक बेटी, पिता हार्ट के मरीज
सूबेदार हीरालाल के 88 वर्षीय पिता हरिराम गांव में रहते हैं और अक्सर अस्वस्थ रहते हैं तथा हार्ट के मरीज हैं। बेटे की शहादत की खबर से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पत्नी रोशनी देवी गृहिणी हैं। बेटा गजेन्द्र आइआइटी पुणे में पढाई कर रहा है और बेटी स्नेहलता दिल्ली में नर्सिंग की पढाई कर रही है। परिवार के लिए हीरालाल ही हर भरोसे और हर हिम्मत का आधार थे।
आज होगा अंतिम संस्कार
शनिवार को उनका पार्थिव देह अकबरपुर पहुंचने की संभावना है। इसके बाद सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। सेना की टुकडी उन्हें अंतिम सलामी देगी और गांव के लोग अपने वीर सपूत को नम आंखों से विदा करेंगे। अकबरपुर के लिए यह गर्व और गम दोनों का पल होगा, जब एक बेटा देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर अमर हो गया।
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