Narak Nivaran Chaturdashi 2026: नरक निवारण चतुर्दशी का विशेष महत्व है. जिसे माघ मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है. इस दिन पूरी श्रद्धा के साथ भगवान शिव की पूजा करने से न केवल नरक के दुखों से मुक्ति मिलती है, बल्कि साधक को सहस्त्र (हजार) अश्वमेध यज्ञ के समान फल की प्राप्ति होती है. आइए जानते हैं इस व्रत का पूरा रहस्य और करने के उपाय.
कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर ज्योतिष विभाग के विभागाध्यक्ष डॉक्टर कुणाल कुमार झा बताते हैं कि इस वर्ष नरक निवारण चतुर्दशी व्रत 17 जनवरी 2026 को मनाया जाएगा. इस व्रत का खास करके मिथिलांचल में विशेष महत्व है. पूरे विश्व में नरक निवारण चतुर्दशी का व्रत मानव जातियों के द्वारा किया जाता है.
इस व्रत के बारे में कहा जाता है कि यह समस्त पापों का नाश कारक होता है. सभी पापों से मुक्त करवाता है. इस व्रत में महादेव का खर्च उपचार से पूजन करना चाहिए. विशेष करके अकाउं, धतूर, भांग इत्यादि चीजों से महादेव का पूजन करें.
नरक निवारण चतुर्दशी करने के लाभ
इस व्रत के करने से सहस्त्र अश्वमेध यज्ञ का लाभ होता है. इन चीजों के साथ पूजन करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है. डॉक्टर कुणाल कुमार झा बताते हैं कि इस व्रत के करने से सहस्त्र अश्वमेध यज्ञ का लाभ प्राप्त होता है. यह व्रत मानव जातियों को पापों से मुक्त करवाता है. इस व्रत में शिवलिंग का उद्भव भी होता है. शिवलिंग का पूजन करना विशेष महत्व रखता है. इस व्रत के अवसर पर मिथिलांचल में कुशेश्वर स्थान और कपिलेश्वर स्थान में महादेव का उत्सव मनाया जाता है. क्योकि नरक निवारण चतुर्दशी के दिन ही उनके प्राण प्रतिष्ठा दिया गया था. इस व्रत को करने से मानव जातियों को पापों से मुक्ति मिलती है. यह व्रत उनके जीवन में सुख और समृद्धि लाता है.
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