नैनीताल: उत्तराखंड की सरोवर नगरी नैनीताल की ऐतिहासिक पहचान और आधुनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए धामी सरकार एक अहम कदम उठाने जा रही है. जहां कभी पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना ने हनीमून मनाया था, उसी ऐतिहासिक मेट्रोपोल क्षेत्र में अब आधुनिक पार्किंग सुविधा विकसित की जाएगी. यह पार्किंग परियोजना शहर की लंबे समय से चली आ रही ट्रैफिक और वाहन पार्किंग समस्या का समाधान मानी जा रही है. इससे एक तरफ जहां जाम आदि की समस्या का समाधान होगा, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय लोगों को भी रोजगार मिलेगा.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को नैनीताल में ₹121 करोड़ 52 लाख 46 हजार की लागत से 13 विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास किया. इन योजनाओं में ₹30.66 करोड़ की दो योजनाओं का लोकार्पण और ₹90.86 करोड़ की 11 योजनाओं का शिलान्यास शामिल है. जिनमें शत्रु संपत्ति मेट्रोपोल होटल में सर्फेस पार्किंग का निर्माण भी है.
42 करोड़ से बनेगी सर्फेस पार्किंग
नैनीताल के मेट्रोपोल में बनने वाली सर्फेस पार्किंग की कुल लागत ₹42.77 करोड़ रुपये है. जिसके तहत लगभग 700 से 800 गाड़ियों की पार्किंग तैयार की जाएगी. मेट्रोपोल सर्फेस पार्किंग बनने से एक तरफ जहां नैनीताल के लोगों को जाम से मुक्ति मिलेगी वहीं पार्किंग की समस्या भी हल हो पाएगी. लंबे समय से मेट्रोपोल होटल शत्रु संपत्ति था, जिसमें अवैध अतिक्रमण किया गया था, प्रशासन द्वारा अतिक्रमण को हटाया गया और पार्किंग निर्माण की कवायद शुरू की गई. ऐसे में नैनीताल आने वाले पर्यटकों को यदि डीएसए ग्राउंड में पार्किंग नहीं मिलती है तो वह सीधा मेट्रोपोल पार्किंग आ सकेंगे. हालांकि वर्तमान में यहां एक अस्थाई पार्किंग चलाई जा रही है, लेकिन सर्फेस पार्किंग बनने के बाद इसका विस्तार हो पाएगा और पर्यटन सीजन में वीकेंड के दौरान लगने वाले जाम आदि की समस्याओं से मुक्ति मिलेगी.
नैनीताल के मेट्रोपोल में बनने वाली सर्फेस पार्किंग की कुल लागत ₹42.77 करोड़ रुपये है. जिसके तहत लगभग 700 से 800 गाड़ियों की पार्किंग तैयार की जाएगी. मेट्रोपोल सर्फेस पार्किंग बनने से एक तरफ जहां नैनीताल के लोगों को जाम से मुक्ति मिलेगी वहीं पार्किंग की समस्या भी हल हो पाएगी. लंबे समय से मेट्रोपोल होटल शत्रु संपत्ति था, जिसमें अवैध अतिक्रमण किया गया था, प्रशासन द्वारा अतिक्रमण को हटाया गया और पार्किंग निर्माण की कवायद शुरू की गई. ऐसे में नैनीताल आने वाले पर्यटकों को यदि डीएसए ग्राउंड में पार्किंग नहीं मिलती है तो वह सीधा मेट्रोपोल पार्किंग आ सकेंगे. हालांकि वर्तमान में यहां एक अस्थाई पार्किंग चलाई जा रही है, लेकिन सर्फेस पार्किंग बनने के बाद इसका विस्तार हो पाएगा और पर्यटन सीजन में वीकेंड के दौरान लगने वाले जाम आदि की समस्याओं से मुक्ति मिलेगी.
जिन्ना ने मनाया था यहां हनीमून
करीब नौ एकड़ में फैले मेट्रोपोल होटल का ऐतिहासिक महत्व भी कम नहीं है. यह होटल साल 1880 में गौधिक शैली में बना था और आजादी से पहले यहां विदेशी मेहमानों और शाही परिवारों का आना-जाना लगा रहता था. इतिहासकार प्रो. अजय रावत के अनुसार, साल 1919 में कायदे आजम मोहम्मद अली जिन्ना अपनी पत्नी रतीबाई के साथ यहां हनीमून मनाने आए थे. आजादी के बाद, जब नवाब महमूदाबाद पाकिस्तान चले गए, तो 1968 में यह होटल ‘शत्रु संपत्ति’ घोषित कर दिया गया. जिसके बाद समय बीतते बीतते इस संपत्ति की हालत भी जीर्णशीर्ण होती रही. पार्किंग से पहले इसके मैदान में शादी-ब्याह जैसे आयोजन होते थे, हालांकि समय के साथ साथ यह इमारत पूरी तरह खंडहर में तब्दील हो चुकी थी. जिसके बाद नगर पालिका द्वार यहां पार्किंग की शुरुआत की गई. वहीं अब इसे स्थाई रूप से सर्फेस पार्किंग में बदला जाएगा.
यह भी पढ़ें: 31 दिसंबर से पहले नैनीताल फुल पैक, बिना होटल बुकिंग शहर में एंट्री पर बैन
करीब नौ एकड़ में फैले मेट्रोपोल होटल का ऐतिहासिक महत्व भी कम नहीं है. यह होटल साल 1880 में गौधिक शैली में बना था और आजादी से पहले यहां विदेशी मेहमानों और शाही परिवारों का आना-जाना लगा रहता था. इतिहासकार प्रो. अजय रावत के अनुसार, साल 1919 में कायदे आजम मोहम्मद अली जिन्ना अपनी पत्नी रतीबाई के साथ यहां हनीमून मनाने आए थे. आजादी के बाद, जब नवाब महमूदाबाद पाकिस्तान चले गए, तो 1968 में यह होटल ‘शत्रु संपत्ति’ घोषित कर दिया गया. जिसके बाद समय बीतते बीतते इस संपत्ति की हालत भी जीर्णशीर्ण होती रही. पार्किंग से पहले इसके मैदान में शादी-ब्याह जैसे आयोजन होते थे, हालांकि समय के साथ साथ यह इमारत पूरी तरह खंडहर में तब्दील हो चुकी थी. जिसके बाद नगर पालिका द्वार यहां पार्किंग की शुरुआत की गई. वहीं अब इसे स्थाई रूप से सर्फेस पार्किंग में बदला जाएगा.
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शहर की यातायात व्यवस्था में होगा सुधार
नैनीताल के अब इस ऐतिहासिक स्थल पर सरफेस पार्किंग बनाने के तहत यहां पार्किंग स्पेस को बढ़ाया जाएगा, इस पहल से ना सिर्फ नैनीताल आने वाले पर्यटकों को राहत मिलेगी, बल्कि शहर की यातायात व्यवस्था में भी सुधार होगा. साथ ही नैनीताल आने वाले पर्यटकों को गाड़ी पार्क करने के लिए एक उपयुक्त जगह मिलेगी. नैनीताल की इस ऐतिहासिक विरासत को संभालते हुए उसका आधुनिक और जनहितकारी उपयोग राज्य सरकार की एक सकारात्मक पहल भी मानी जा रही है.
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