Ranchi Pithoria Kila: रांची के पिथौरिया किले पर हर साल बिजली गिरती है, जिसे राजा जगतपाल सिंह को ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव के श्राप से जोड़ा जाता है. यहां रात में रहस्यमयी आवाजें और सुगंध भी आती हैं. 100 कमरों का 300 साल पुराना ये महल खंडहर बनता जा रहा है.
झारखंड की राजधानी रांची में एक ऐसा किला पिथौरिया में है. जहां पर पूरे मोहल्ले और कस्बे को छोड़कर सिर्फ इसी महल पर बिजली गिरती है. इतना ही नहीं, इस महल के पीछे एक कहानी भी छुपी हुई है. रांची के जाने-माने साहित्यकार मनोज करपरदार बताते हैं कि अंग्रेजों को छोटा नागपुर इलाके में अपने पैर पसारने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था. कहा जाता है कि ऐसी स्थिति में अंग्रेज अधिकारी थॉमस विल्किंसन ने राजा जगतपाल सिंह से हाथ मिलाया था.

राजा जगतपाल सिंह उस समय पिथोरिया में शासन करते थे. और अपने कई सारे नेक कार्य के लिए भी जाने जाते थे और काफी लोकप्रिय भी थे, लेकिन उन्होंने अंग्रेजों से हाथ मिला लिया और कई सारी जरूरी और महत्वपूर्ण जानकारी अंग्रेजों के साथ साझा भी करना शुरू कर दी. अंग्रेजों की मदद करना शुरू कर दिया, जो अगले कई सालों तक चलता रहा.

ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव ने जब अंग्रेजों के खिलाफ जब मोर्चा खोला. तब राजा जगतपाल सिंह ने अंग्रेजो का साथ दिया. इसी कारण ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव को अंग्रेजों द्वारा फांसी हुई दी गई. स्थानीय लोगों का कहना है कि जब क्रांतिकारी ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव को फांसी पर लटकाया जा रहा था. तब उन्होंने राजा जगतपाल सिंह को श्राप दिया.
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यहां भविष्य में कोई उनका नाम लेने वाला नहीं रहेगा. उनके 100 कमरों के आलीशान महल पर हर साल बिजली गिरेगी और ऐसा तब तक होता रहेगा. जब तक किला पूरी तरह से खंडहर बनकर बर्बाद नहीं हो जाता है. ऐसे पूरे गांव को छोड़कर सिर्फ इसी किले में हर साल बिजली गिरती है और यह पूरा खंडहर हो चुका है.

जब भी बरसात का सीजन होता है या फिर बिजली गिरती है तो बस इसी महल पर गिरती है. आसपास 10 मीटर की दूरी पर जो घर है उसके ऊपर नहीं गिरती, चारों तरफ कहीं नहीं. बस बीच में इस महल पर ही. लोगों का कहना है कि इतना एक्यूरेट हर साल गिरना यह कैसे हो सकता है, यह श्राप का ही असर है.

इसके अलावा यहां के स्थानीय लोग बताते हैं कि रात में यहां से खाना बनाने की बहुत ही बढ़िया सुगंध आती है. ऐसा लगता है कि कोई मालपुआ, सब्जी और बढ़िया खीर बना रहा हो. समझ में नहीं आ रहा है, कौन बना रहा है. क्योंकि वहां तो कोई है ही नहीं, सिर्फ खंडहर है. ऐसे में कई बार हमने देखने की भी कोशिश की पर ऐसा कुछ नजर नहीं आया.

इसके अलावा कई बार रात में भारत माता की जय इस तरीके के नारे सुनाई देते हैं. यहां पायल की आवाज सुनाई देती है. ऐसा लगता है कि पूरी रात कोई पायल पहन के कोई नाच रहा हो. इस तरह की चीज देखने को मिलती है. इसीलिए रात में हम लोग उस तरफ का खिड़की पूरी तरह बंद करके रखते हैं. रात में देखने की भी हिम्मत नहीं करते हैं.
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