मुंगेर के 2018 के बहुचर्चित ए–के–47 बरामदगी मामले में बड़ा फैसला आया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय, प्रवाल दत्ता की अदालत ने मुफस्सिल थाना से जुड़े इस मामले में सभी 10 आरोपितों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। अभियोजन की ओर से अपर लोक अभियोजक विनोद यादव और बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता विश्वजीत सिंह ने अदालत में अपना पक्ष रखा।
इस मामले में रिजवान पठान, मु. लुकमान, आइशा बेगम, तनवीर आलम उर्फ सोनू, मु. गुलफाम उर्फ गूलन, मु. रिजवान उर्फ भुट्टो, मु. परवेज चांद, मुस्तकीम, खुर्शीद आलम और सदा रिफत को आरोपित बनाया गया था। इनमें से तनवीर आलम उर्फ सोनू, मु. गुलफाम उर्फ गूलन और रिजवान उर्फ भुट्टो न्यायिक हिरासत में जेल में थे, जबकि बाकी सात आरोपी जमानत पर थे।
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बताया जाता है कि 30 सितंबर 2018 को मुफस्सिल थाने में तत्कालीन अंचल निरीक्षक बिंदेश्वरी यादव के लिखित बयान के आधार पर मामला दर्ज किया गया था। आरोप था कि रिजवान उर्फ भुट्टो के स्वीकारोक्ति बयान के अनुसार, सदर प्रखंड के मिर्जापुर बरदह गांव में अजमेरी बेगम की जमीन में जेसीबी से खुदाई कर प्लास्टिक के बोरे में ए–के–47 का पार्ट-पुर्जा बरामद किया गया।
गौरतलब है कि 2018 में मिर्जापुर बरदह गांव से अलग-अलग तिथियों में करीब 18 ए–के–47 राइफल की बरामदगी हुई थी, जिसका संबंध जबलपुर ऑर्डनेंस फैक्ट्री से जोड़ा गया। इस पूरे मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने भी दो मामले दर्ज किए थे, जबकि मुफस्सिल थाने में कई मुकदमे दर्ज थे। इन्हीं में से एक मामले में अदालत ने सभी आरोपितों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।
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