मुंबई में बढ़ते वायु प्रदूषण को लकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को मुंबई और नवी मुंबई की नगर निगमों के अधिकारियों को कठोर चेतावनी दी है। कोर्ट ने कहा कि अगर उन्होंने वायु प्रदूषण कम करने के आदेशों का पालन नहीं किया, तो उनके वेतन रोक दिए जाएंगे। कोर्ट ने कहा कि अधिकारी भी वही प्रदूषित हवा सांस ले रहे हैं, कोई अलग दुनिया में नहीं रहते। इतना ही नहीं सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दोनों नगर निगमों के आयुक्तों को चेतावनी भी दी।
कोर्ट ने कहा कि अगर उन्होंने लगातार जारी किए गए आदेशों का पालन नहीं किया, तो उनके वेतन रोक दिए जाएंगे। अदालत ने कहा कि पिछले साल 2023 में खुद ही (सुओ मोटु) प्रदूषण बढ़ने के मामले में कदम उठाए थे और नगर निगमों को निर्देश दिए थे कि वायु प्रदूषण कम करने के लिए ठोस कदम उठाएं।
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बीएमसी के वकील ने कोर्ट में दी दलील
वहीं कोर्ट की फटकार के बाद बीएमसी के वकील अपनी दलील पेश की। उन्होंने कोर्ट को बताया कि कई निर्माण स्थलों पर काम रोकने के नोटिस जारी किए गए हैं और लगभग 600 में से 400 साइटों पर एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग डिवाइस लगाए गए हैं।
हालांकि, कोर्ट ने इस जवाब से संतोष नहीं जताया और कहा कि ये सभी कदम केवल कोर्ट के आदेशों के बाद ही उठाए गए, जबकि वर्षों तक कोई स्वयंसेवी और गंभीर प्रयास नहीं किए गए। कोर्ट ने एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग के डेटा की विस्तृत रिपोर्ट मांगी और बीएमसी को नवंबर 2025 से तीन महीने पहले तक का रोजाना का सेंसर डेटा जमा करने का निर्देश दिया।
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अधिकारियों को सख्ती से लगाई फटकार
कोर्ट ने यह भी कहा कि नगर निगमों द्वारा दाखिल हलफनामों में वार्ड-वार विवरण नहीं है और इससे प्रतीत होता है कि अधिकारियों ने प्रदूषण कम करने में गंभीरता से काम नहीं किया। अदालत ने साफ किया कि यह सिर्फ जांच करने का मामला नहीं है, बल्कि नगर निगमों की जिम्मेदारी है कि वे हवा को साफ और सुरक्षित बनाने के लिए ठोस कदम उठाएं।
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