जिले में राजस्व मामलों में लापरवाही पर कलेक्टर गौरव बैनल ने सख्त रुख अपनाया है। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद कलेक्टर ने बरगवां तहसील का औचक निरीक्षण किया और एक पटवारी को निलंबित करने के साथ ही दो प्रभारी तहसीलदारों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
ग्रामीणों की ओर से राजस्व प्रकरणों के लंबित रहने और समय-सीमा में निपटारा न होने की शिकायतें मिल रही थीं। इसे गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर बिना पूर्व सूचना के तहसील कार्यालय पहुंचे। अचानक हुए निरीक्षण से राजस्व अमले में हड़कंप मच गया। कलेक्टर ने मौके पर ही नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा और नक्शा सुधार से संबंधित फाइलें तलब कर एक-एक प्रकरण की समीक्षा की।
जांच में पाया गया कि कई मामले महीनों से लंबित पड़े हैं और निर्धारित समय-सीमा का पालन नहीं किया गया। कुछ फाइलों में सुनवाई की तारीख तक दर्ज नहीं थी और कोई ठोस कार्रवाई भी नहीं हुई थी। कलेक्टर ने इसे गंभीर लापरवाही और उदासीनता माना।
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सबसे गंभीर मामला एक पटवारी से जुड़ा पाया गया, जिस पर राजस्व प्रकरणों को जान-बूझकर लंबित रखने और हितग्राहियों को परेशान करने के आरोप सामने आए। प्रारंभिक जांच में दोषी पाए जाने पर कलेक्टर ने संबंधित पटवारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के आदेश दिए।
इसके साथ ही बरगवां के प्रभारी तहसीलदार नागेश्वर पनिका और बड़ोखर के प्रभारी तहसीलदार दिनेश पनिका को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। आरोप है कि उन्होंने राजस्व प्रकरणों की नियमित मॉनिटरिंग नहीं की और अधीनस्थ कर्मचारियों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं रखा। निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर विभागीय कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
कलेक्टर ने अन्य कर्मचारियों को भी सख्त निर्देश दिए कि राजस्व विभाग आम जनता से सीधे जुड़ा है और जमीन से संबंधित मामलों में देरी विवाद और कानून-व्यवस्था की स्थिति को प्रभावित कर सकती है। सभी लंबित प्रकरणों की सूची तैयार कर विशेष अभियान चलाने तथा साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर की इस कार्रवाई के बाद तहसील कार्यालय में सतर्कता बढ़ गई है और राजस्व प्रकरणों के शीघ्र निपटारे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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