मोगा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की भाजपा की ‘बदलाव रैली’ के दौरान कौमी इंसाफ मोर्चा और विभिन्न किसान संगठनों ने काले झंडे दिखाकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने बंदी सिखों की रिहाई और किसानों की लंबित मांगों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि जिन बंदी सिखों ने अपनी सजा पूरी कर ली है, उन्हें बिना शर्त रिहा किया जाए। उन्होंने गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के मामलों में सख्त कानून बनाने की भी मांग उठाई। एमएसपी पर कानूनी गारंटी देने व किसानों-मजदूरों का कर्ज माफ करने की मांग किसान संगठनों के नेताओं ने केंद्र सरकार से किसानों के लिए एमएसपी पर कानूनी गारंटी देने, किसानों और मजदूरों का पूरा कर्ज माफ करने तथा अमेरिका के साथ प्रस्तावित फ्री ट्रेड समझौते को रद्द करने की अपील की। इसके अतिरिक्त, बिजली संशोधन बिल 2020 को वापस लेने की मांग भी की गई। विरोध प्रदर्शन में कौमी इंसाफ मोर्चा की तालमेल कमेटी के सदस्य जथेदार गुरदीप सिंह बठिंडा और बलविंदर सिंह प्यारेआणा मौजूद थे। भारतीय किसान यूनियन तोतेवाल के प्रदेश अध्यक्ष सुख गिल भी उपस्थित रहे। 2027 के चुनावों से पहले की बदलाव रैली इस अवसर पर किसान संगठनों के कई नेताओं ने संबोधित करते हुए कहा कि जब तक केंद्र सरकार सिख पंथ और किसानों से जुड़े मुद्दों का समाधान नहीं करती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। नेताओं ने यह भी कहा कि भले ही भाजपा ने 2027 के चुनावों को ध्यान में रखते हुए मोगा से ‘बदलाव रैली’ की शुरुआत की हो, लेकिन जब तक किसानों और सिख समुदाय से जुड़े मुद्दों का हल नहीं होता, तब तक पंजाब में भाजपा को मजबूत नहीं होने दिया जाएगा। विरोध प्रदर्शन में किसान नेता और कार्यकर्ता हुए शामिल इस विरोध प्रदर्शन में विभिन्न जिलों और ब्लॉकों से बड़ी संख्या में किसान नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। उन्होंने संयुक्त रूप से केंद्र सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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