मॉडल टाउन निवासी निकिता बजाज (25) की मौत के मामले में कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने कड़ा संज्ञान लिया है। उन्होंने एसपी अजीत सिंह शेखावत को फोन कर मामले में कड़ी धाराएं लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने एसपी से फोन पर कहा कि इतनी शराब पीकर पुलिस वाला गाड़ी चला रहा है जिसका काम रोकना है वह खुद कानून तोड़ रहा है। इसकी जमानत इतनी जल्द कैसे हो गई। इसका मतलब ठीक धाराएं ही नहीं लगीं। मंत्री ने कहा कि जब एसएचओ कह रहे हैं कि उसने शराब पी रखी थी, मेडिकल में आ गया, वीडियो भी है। इस पर दोबारा कार्रवाई करो। इसके बाद कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने परिजनों को एसपी के पास भेज दिया।
11 फरवरी को हुआ था हादसा
11 फरवरी को कालीपलटन पुल के आगे मॉडल टाउन निवासी निकिता पर वरना कार चढ़ गई थी। कार चढ़ाने का आरोप नशे में धुत हेड कांस्टेबल अमित कुमार पर लगे थे। शनिवार को निकिता के पिता, भाई और मां स्थानीय लोगों के साथ छावनी की शास्त्री कॉलोनी में मंत्री अनिल विज के आवास पर पहुंचे थे। उन्होंने कहा था कि इस मामले में पुलिस ने गंभीर धाराएं नहीं लगाईं और आरोपी की जमानत हो गई।
गैर इरादतन हत्या की धारा लगाने का आश्वासन
शनिवार को अवकाश होने के कारण निकिता के परिजन एसपी से कैंप कार्यालय पर मिले। एसपी अजीत सिंह से मिलने के बाद परिजनों को न्याय की आस जगी है। निकिता के भाई और इस घटना के चश्मदीद हर्ष ने बताया कि एसपी को हमने अपनी तहरीर भी दिखाई जिसमें हमने लिखा था कि आरोपी हेड कांस्टेबल भागने के दौरान हमने पकड़ा था। हर्ष ने बताया कि उन्हें आश्वासन दिया गया है कि केस में बीएनएस में गैर इरादतन हत्या की धारा 105 को जोड़ा जाएगा। वहीं पुलिस कर्मी के खिलाफ भी विभाग सख्त कार्रवाई करेगा।
धारा बदली तो हेड कांस्टेबल की बढ़ेगी मुश्किलें
पीड़ित पक्ष की तरफ से अधिवक्ता व बार एसोसिएशन अंबाला के पूर्व प्रधान दिलबाल सिंह ने बताया कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 105 गैर-इरादतन हत्या के लिए सजा का प्रावधान करती है। यह धारा ऐसे कृत्य के लिए दंडित करती है जिससे मृत्यु हो, लेकिन वह हत्या की श्रेणी में न आए। इसमें आजीवन कारावास या 5-10 साल तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है, जो अपराध के इरादे पर निर्भर करता है। यह धारा लापरवाही से गाड़ी चलाने या हिट-एंड-रन जैसे मामलों में मृत्यु के मामलों पर भी लागू होती है। यह धारा हत्या के बराबर न होने वाले आपराधिक मानव वध से संबंधित है और सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय है।
अधिकारी के अनुसार
पीड़ित परिजनों की बात सुनी गई है। इस पर एचएचओ को निर्देश दिए गए हैं कि धारा 105 के प्राविधानों पर विचार करें। इस धारा के लगने के बाद कोर्ट की अनुमति से आरोपी को दोबारा से गिरफ्तार किया जाएगा। वहीं इस धारा के लगने के बाद लापरवाही से गाड़ी चलाने की धारा 106 को हटाया जाएगा क्याेंकि दोनों धाराओं में से एक ही लगाई जा सकती है। -अजीत सिंह शेखावत, एसपी, अंबाला।
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