गोड्डा के कृषि वैज्ञानिकों ने पानी की कमी से जूझ रहे किसानों को ‘सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली’ अपनाने की सलाह दी है. टपक और फव्वारा विधि से 95% तक पानी की बचत और दोगुनी उपज संभव है. किसान इन आधुनिक यंत्रों को सरकारी अनुदान पर प्राप्त कर अपनी आय बढ़ा सकते हैं.
इसी समस्या के समाधान को लेकर गोड्डा जिले के तिलकामांझी कृषि महाविद्यालय के कनीय वैज्ञानिक सहायक प्रोफेसर इंजीनियर कुणाल प्रसाद ने किसानों को एक महत्वपूर्ण और आधुनिक विकल्प की जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि अब किसान कम पानी में भी खेती कर सकते हैं और बेहतर तकनीक अपनाकर दोगुनी उपज प्राप्त कर सकते हैं. इसके लिए किसानों को अपने खेतों में सूक्ष्म सिंचाई यंत्र लगाना होगा.
इंजीनियर कुणाल प्रसाद ने बताया कि सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के तहत मुख्य रूप से दो विधियां प्रचलित हैं. पहली है टपक सिंचाई विधि, जिसमें पौधों की जड़ों तक सीधे बूंद-बूंद पानी पहुंचाया जाता है. इससे पानी की बर्बादी नहीं होती और पौधों को जरूरत के अनुसार नमी मिलती है. दूसरी विधि है फव्वारा या स्प्रिंकलर विधि, जिसमें खेतों में फुहार के रूप में पानी का छिड़काव किया जाता है. यह विधि सब्जी, अनाज, दलहन, तिलहन और नर्सरी पौधों के लिए काफी कारगर मानी जाती है.
सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली
उन्होंने बताया कि सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली पूरी तरह से विज्ञान और आधुनिक तकनीक पर आधारित है, जिससे खेतों में समान रूप से सिंचाई होती है. इस तकनीक से 90 से 95 प्रतिशत तक पानी की बचत संभव है, जो पानी की कमी वाले क्षेत्रों के लिए बेहद लाभकारी है. साथ ही, इससे फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार होता है.
इंजीनियर कुणाल प्रसाद ने यह भी जानकारी दी कि किसान इन सूक्ष्म सिंचाई यंत्रों को सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के तहत अनुदान राशि पर प्राप्त कर सकते हैं. इससे किसानों पर आर्थिक बोझ भी कम पड़ेगा और वे आधुनिक तकनीक को आसानी से अपना सकेंगे.
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान सूक्ष्म सिंचाई जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाते हैं, तो गोड्डा जिले में पानी की समस्या के बावजूद खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है. यह तकनीक न केवल जल संरक्षण को बढ़ावा देगी, बल्कि किसानों की आमदनी बढ़ाने में भी अहम भूमिका.
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मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.
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