मीडिया से बातचीत में मीनाक्षी शेषाद्री ने अपने बचपन, फिल्मी सफर, मौजूदा सिनेमा और महिलाओं की भूमिका पर बेबाकी से विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि उनका जन्म ऐसे परिवार में हुआ, जहां संगीत, नृत्य, अभिनय और संस्कृत का समृद्ध वातावरण था। उनकी मां उनकी पहली गुरु थीं, जिन्होंने उन्हें भरतनाट्यम की शिक्षा दी।
उन्होंने बताया कि दिल्ली में पढ़ाई के दौरान उन्होंने मजाक में एक सौंदर्य प्रतियोगिता में भाग लिया और मिस इंडिया चुनी गईं। इसके बाद उनका फिल्मी करियर तेजी से आगे बढ़ा। 80 और 90 के दशक में उन्होंने करीब 80-90 फिल्मों में काम किया। हिंदी सिनेमा के साथ-साथ वे तमिल और तेलुगु फिल्मों में भी सक्रिय रहीं।
विवाह के बाद वह अमेरिका चली गईं और लंबे समय तक फिल्मी दुनिया से दूर रहीं। अब लगभग 30 वर्षों बाद उन्होंने मनोरंजन जगत में दोबारा सक्रियता दिखाई है। इसे अपनी ‘सेकंड इनिंग्स’ बताते हुए उन्होंने कहा कि वह भविष्य को लेकर उत्साहित हैं और नई संभावनाओं की तलाश कर रही हैं। अपनी चर्चित फिल्म दामिनी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ‘दामिनी’ केवल एक किरदार नहीं, बल्कि एक मजबूत संदेश था, जो आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को साहस और आत्मविश्वास के साथ आगे आना चाहिए। समाज में सकारात्मक बदलाव की आवश्यकता है और सिनेमा इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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वर्तमान सिनेमा पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि न तो पहले का दौर पूरी तरह सही था और न ही आज का। ओटीटी और सोशल मीडिया के प्रभाव से बड़े पर्दे का व्यवसाय प्रभावित हुआ है, लेकिन समय के साथ एक नया संतुलन जरूर बनेगा। अंत में उन्होंने कहा कि वह ऐसे किरदार निभाना चाहती हैं, जिन्हें पूरा परिवार साथ बैठकर गर्व से देख सके। खरगोन जैसे शहर में भरतनाट्यम प्रस्तुत करने का अवसर मिलने पर उन्होंने खुशी जताई और कहा कि शास्त्रीय नृत्य यदि सही तरीके से प्रस्तुत किया जाए तो हर वर्ग के लोग उसे समझ और आनंद ले सकते हैं।
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