Mauni Amavsya 2026: हरिद्वार में मौनी अमावस्या पर पितृ दोष शांति के लिए पिंडदान और तर्पण का विशेष महत्व है. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार हर की पौड़ी, कुशावर्त घाट, ब्रह्मकुंड, चंडी घाट, कनखल और नारायणी शिला पर पितृ पूजा करने से पितरों की कृपा मिलती है और बाधाएं दूर होती हैं.
हरिद्वार. यदि घर में बार-बार लड़ाई झगड़ा, कलह का वातावरण और आपके कार्यों में रुकावट आ रही है, तो यह पितृ दोष के संकेत हैं. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कार्यों में रुकावट, कार्यों में बाधा, मानसिक समस्याएं आदि कई संकेत ऐसे होते हैं, जो पितृ दोष के कारण होते हैं. यदि आप अपने पितरों को मनाना चाहते हैं तो संवत की सबसे बड़ी अमावस्या का आगमन हो रहा है ऐसे में आप हरिद्वार के कुछ स्थान पर अपने नाराज पितरों को मनाने के लिए पिंडदान तर्पण करके अपने पितरों को तृप्त कर सकते हैं, जिससे आपके कार्यों में आ रही बाधाएं खत्म होगी और आप पर पितरों का पूर्ण आशीर्वाद बना रहेगा. हरिद्वार देवों की भूमि के साथ पितरों की मुक्ति का भी द्वार है, जहां पितृ कार्य करने का विशेष महत्व बताया गया है. चलिए विस्तार से जानते हैं कि हरिद्वार में कहां पितृ पूजा करने पर लाभ मिलेगा.
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Lalit Bhattपिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 में प्रिंट मीडिया से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों म…और पढ़ें