धाम परिसर को आकर्षक फूल सज्जा, रंगीन रोशनी और पारंपरिक तोरण द्वारों से सजाया गया था। सुबह से ही श्रद्धालुओं और मेहमानों की भीड़ उमड़ने लगी थी। समारोह की शुरुआत पारंपरिक बारात से हुई। दूल्हे घोड़े पर सवार होकर बैंड-बाजे के साथ विवाह स्थल तक पहुंचे। ढोल-नगाड़ों और शहनाई की गूंज के बीच वरमाला की रस्म अदा की गई। इसके बाद सभी मंडपों में पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रों के साथ सात फेरे और अन्य वैवाहिक विधियां संपन्न कराई गईं।
जमकर थिरके बागेश्वर बाबा
कार्यक्रम में पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की विशेष उपस्थिति रही। उन्होंने सभी नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि विवाह केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो परिवारों का पवित्र मिलन है। आयोजन में चिली, उरुग्वे, पनामा, पैराग्वे, सूरीनाम और अल साल्वाडोर के राजदूतों ने भी भागीदारी की। विदेशी मेहमानों ने भारतीय परंपरा की सराहना की और संगीत की धुन पर बागेश्वर महाराज के साथ मंच पर उत्साहपूर्वक नृत्य भी किया। समारोह में जगद्गुरु रामभद्राचार्य, अनिरुद्ध आचार्य, इंद्रेश कुमार, साध्वी ऋतंभरा, बद्रीनाथ धाम के बाल योगेश्वर दास महाराज और अयोध्या के राजू दास महाराज सहित अनेक संत-महात्माओं ने मंच से वर-वधू को आशीर्वचन दिए। वहीं मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला सहित कई सांसद, विधायक और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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बाबा बागेश्वर के गले लगकर रोए नए जोड़े
विवाह उपरांत कई नवविवाहित जोड़े भावुक नजर आए। कुछ जोड़ों ने मंच पर पहुंचकर बागेश्वर महाराज के गले लगकर आभार व्यक्त किया तो कई ने चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया। आयोजन समिति की ओर से प्रत्येक जोड़े को 30 हजार रुपए की एफडी (फिक्स्ड डिपॉजिट) के साथ गृहस्थी प्रारंभ करने हेतु आवश्यक सामान—जैसे बिस्तर, बर्तन, सिलाई मशीन और अन्य घरेलू उपयोग की वस्तुएं—भेंट की गईं।
लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी के बावजूद आयोजन पूरी तरह सुव्यवस्थित रहा। बागेश्वर धाम समिति, जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन की कड़ी व्यवस्थाओं के चलते कहीं भी अव्यवस्था की स्थिति नहीं बनी। सुरक्षा, यातायात और भोजन व्यवस्था के लिए अलग-अलग टीमें तैनात थीं। महाशिवरात्रि के अवसर पर आयोजित यह सामूहिक विवाह महोत्सव न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक सरोकार और सेवा भावना का भी उदाहरण प्रस्तुत करता नजर आया। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों को सम्मानपूर्वक वैवाहिक जीवन की शुरुआत दिलाने की इस पहल की चारों ओर सराहना हो रही है।
बागेश्वर धाम में 305 निर्धन बेटियों का सामूहिक विवाह


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