सर्जरी में तीन घंटे का लगा समय
इस ऐतिहासिक सर्जरी को वरिष्ठ स्त्रीरोग विशेषज्ञ एवं एडवांस्ड लैप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. उदय भानु राणा ने अपनी विशेषज्ञ टीम के साथ अंजाम दिया. सर्जरी में लगभग ढाई से तीन घंटे का समय लगा और यह तकनीकी दृष्टि से अत्यंत चुनौतीपूर्ण रही. इतने बड़े आकार और वजन के फाइब्रॉएड को पारंपरिक ओपन सर्जरी के बजाय लैप्रोस्कोपिक तकनीक से निकालना डॉक्टरों के कौशल, अनुभव और आधुनिक चिकित्सा तकनीक का उत्कृष्ट उदाहरण है.
फाइब्रॉएड को लैप्रोस्कोपिक सर्जरी द्वारा निकालना एक नया रिकॉर्ड
चिकित्सा साहित्य के अनुसार, भारत में अब तक लैप्रोस्कोपिक विधि से निकाले गए सबसे बड़े फाइब्रॉएड गर्भाशय का वजन लगभग 4.5 किलोग्राम दर्ज किया गया था. ऐसे में 5.21 किलोग्राम वजन का फाइब्रॉएड लैप्रोस्कोपिक सर्जरी द्वारा निकालना एक नया रिकॉर्ड है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह सर्जरी विश्व स्तर पर भी शुद्ध लैप्रोस्कोपिक पद्धति से की गई सबसे बड़ी और जटिल सर्जरियों में शामिल की जा सकती है.
मरीज की स्थिति स्थिर है
डॉ. उदय भानु राणा ने बताया कि इस तरह की सर्जरी में रक्तस्राव को नियंत्रित करना, आसपास के अंगों को सुरक्षित रखना और मरीज की रिकवरी को ध्यान में रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है. आधुनिक उपकरणों, सटीक योजना और अनुभवी टीम के सहयोग से यह सर्जरी पूरी तरह सफल रही. सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति स्थिर है और वह तेजी से स्वस्थ हो रही है.
भविष्य में न्यूनतम इनवेसिव सर्जरी को और बढ़ावा देगी
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