ग्रहों के राजा सूर्य 15 जनवरी को धनु से मकर राशि में प्रवेश करेंगे। अब वर्ष 2080 तक मकर संक्रांति 15 जनवरी को ही मनाई जाएगी। इसके बाद फिर ज्योतिषीय गणना के अनुसार मकर संक्रांति की तिथि एक दिन आगे बढ़ जाएगी। यानी सूर्य का राशि परिवर्तन हर वर्ष 16 जनवरी को होगा। इस बार सूर्य का राशि परिवर्तन रात्रि 9.38 बजे हो रहा है। इसके साथ ही खरमास समाप्त होगा और मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे।
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Makar Sankranti
– फोटो : adobe stock
इस बार वृद्धि योग, शुक्ल पक्ष द्वादशी तिथि और ज्येष्ठा नक्षत्र में गुरुवार (15 जनवरी) को मकर संक्रांति मनाई जाएगी। शास्त्रों के अनुसार उत्तरायण की अवधि को देवताओं का दिन और दक्षिणायन को देवताओं की रात कहा जाता है। ज्योतिषविद् आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री ने बताया कि मकर संक्रांति के दिन साधारण नदी भी गंगा के समान पुण्यदायिनी हो जाती है।
ज्योतिषविदों के अनुसार हर वर्ष सूर्य के राशि परिवर्तन में लगभग 20 मिनट का विलंब होता है। इस प्रकार तीन वर्षों में यह अंतर एक घंटे का हो जाता है। 72 वर्षों में 24 घंटे का फर्क आ जाता है। सूर्य और चंद्रमा ग्रह मार्गीय होते हैं, ये पीछे नहीं चलते। इसलिए तिथि में एक दिन की वृद्धि हो जाती है। इस लिहाज से वर्ष 2008 में ही 72 वर्ष पूरे हो गए थे। हालांकि छह वर्षों तक सूर्य का राशि परिवर्तन प्रातःकाल में होने से पूर्व काल मानते हुए मकर संक्रांति 15 जनवरी को ही मनाई जाती रही। इससे पहले सूर्य का राशि परिवर्तन संध्याकाल में होता था। वर्ष 1936 से मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जा रही थी। वहीं 1864 से 1936 तक 13 जनवरी और 1792 से 1864 तक 12 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई जाती थी।