देवघर के ज्योतिषाचार्य पंडित नंद किशोर मुदगल ने लोकल 18 के संवाददाता से बातचित करते हुए कहा कि मकर संक्रांति का धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व अत्यंत विशेष है. इस दिन सूर्य उत्तरायण होते हैं, जिसे देवताओं का दिन माना जाता है. शास्त्रों के अनुसार उत्तरायण काल में किए गए पुण्य कर्मों का फल कई गुना बढ़ जाता है. यही कारण है कि मकर संक्रांति के दिन स्नान, दान और पूजा का विशेष विधान बताया गया है. इस साल 14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति का उत्सव मनाया जाएगा.
पारंपरिक भोजन खाने का है विधान
इस पर्व पर पारंपरिक भोजन का भी खास महत्व है. मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी, दही-चूड़ा, तिल से बने लड्डू, गुड़, चावल और दाल जैसे सात्विक भोजन ग्रहण करने की परंपरा है. तिल और गुड़ का सेवन शरीर को गर्मी देता है और स्वास्थ्य की दृष्टि से भी लाभकारी माना जाता है. साथ ही यह आपसी प्रेम और मधुर संबंधों का प्रतीक भी है.
नदी में स्नान कर.. दान करें
ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति के दिन प्रातःकाल पवित्र नदी या जलाशय में स्नान कर भगवान सूर्यदेव की पूजा-अर्चना करनी चाहिए. स्नान के बाद दान करने से जीवन में सुख-समृद्धि, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. विशेष रूप से इस दिन तिल, गुड़, दही, दाल, चावल, वस्त्र और कंबल का दान अत्यंत शुभ माना जाता है. ऐसा विश्वास है कि इन वस्तुओं के दान से कुंडली में सूर्य और शनि ग्रह मजबूत होते हैं और कई प्रकार के ग्रह दोष भी दूर होते हैं.
क्या है दान का महत्व
मकर संक्रांति के अवसर पर लोग स्नान के बाद अन्न, गुड़, काला तिल, गुड़, गर्म कपड़े आदि का दान करते हैं. इस दिन लोगों को आपने खिचड़ी या फिर चावल, उड़द की दाल और सब्जियों का दान करते देखा होगा. दान करने से आपके ग्रह दोष तो मिटते ही हैं, आपके पितर भी खुश होते हैं. पितरों का स्मरण करके दान करेंगे तो आपको पितृ दोष से मुक्ति मिलती है. कहा जाता है दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है. पितृ, देव और ऋषि ऋण से मुक्ति मिलती है.
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